नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र "बालेन" शाह ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है, जो उनके कार्यकाल की पहली बड़ी राजनयिक यात्रा होगी। विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने पुष्टि की है कि दोनों देशों के विदेश मंत्रालय इस यात्रा की तैयारियों में जुट गए हैं। नई दिल्ली की यह यात्रा शाह के लिए वैश्विक पटल पर नेपाल का नया दृष्टिकोण रखने का एक महत्वपूर्ण अवसर साबित होने वाली है।
राजनयिक स्तर पर सक्रियता के साथ-साथ, प्रधानमंत्री शाह ने घरेलू मोर्चे पर शासन व्यवस्था को बदलने के लिए एक व्यापक 100 सूत्रीय सुधार एजेंडा जारी किया है। इस योजना का मुख्य लक्ष्य शिक्षा और प्रशासन से राजनीतिक प्रभाव को पूरी तरह समाप्त करना है। इसके तहत, 90 दिनों के भीतर स्कूलों और विश्वविद्यालयों से राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों को हटाकर गैर-पक्षपाती छात्र परिषदों का गठन किया जाएगा।
बालेन शाह के इस एजेंडे में वीआईपी संस्कृति पर सीधा हमला किया गया है। सरकारी कार्यालयों से राजनीतिक नेताओं की तस्वीरें हटाने, मंत्रियों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की अनिवार्यता और वीआईपी काफिलों के कारण होने वाली जन-असुविधाओं को कम करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, सरकारी कार्यों में देरी को समाप्त करने के लिए "जीरो पेंडिंग फाइल" अभियान और संघीय मंत्रालयों की संख्या घटाकर 17 करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
साल 2025 के विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रहे युवा इस नई रणनीति को उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। एजेंडे में उन छात्रों के परिवारों को नौकरी देने का भी प्रावधान है, जिन्होंने प्रदर्शनों के दौरान अपनी जान गंवाई थी। साथ ही, औपनिवेशिक या विदेशी नाम वाले विश्वविद्यालयों के नाम बदलने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
जहां एक ओर नई दिल्ली की यात्रा की तैयारियां चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर इन साहसिक आंतरिक सुधारों ने नेपाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। बालेन शाह का यह नया "गवर्नेंस मॉडल" नेपाल की पुरानी व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है।