यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल पवित्र पशुपतिनाथ मंदिर परिसर में नियमों और कानूनों को धता बताते हुए गिरोहों और बिचौलियों का राज चलने का गंभीर खुलासा हुआ है। पशुपति क्षेत्र विकास कोष (PADT) के उच्च अधिकारियों, प्रशासनिक प्रमुख और विभागीय मंत्री के साथ स्थानीय नातेदारी व घनिष्ठ संबंधों के बल पर भालेश्वर प्रा. लि. के संचालक राजन गुरुंग पर फोटोग्राफर के नाम पर गुंडे पालने और श्रद्धालुओं से भारी रकम वसूलने का धंधा चलाने का गंभीर आरोप लगा है।
कोष के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अपने व्यक्तिगत स्वार्थों के अनुरूप पशुपति के नियमों व कानूनों से खिलवाड़ किए जाने के कारण मंदिर परिसर अवैध वसूली और गुंडागर्दी का अड्डा बन गया है।
समझौते का उल्लंघन, अवैध वसूली और श्रद्धालुओं के साथ मारपीट
वर्ष 2021 में, पशुपति क्षेत्र विकास कोष ने कास्की के राजन गुरुंग द्वारा संचालित भालेश्वर प्रा. लि. के साथ 5 साल का समझौता किया था, जिसमें आने वाले श्रद्धालुओं की यादों के लिए फोटो खींचने हेतु एक निश्चित क्षेत्र तय किया गया था और कार्यकारी आदेशों के अनुसार मासिक शुल्क चुकाने की शर्त रखी गई थी।
हालांकि, समझौते के अनुसार कोष को दी जाने वाली तय राशि भी भालेश्वर प्रा. लि. ने नियमित रूप से नहीं चुकाई, जबकि मंदिर परिसर में दर्जनों अनधिकृत वीडियोग्राफरों और कैमरा ऑपरेटरों को तैनात करके श्रद्धालुओं से मनमाना शुल्क वसूलने का काम लगातार जारी रखा।
संबंधित फर्म के फोटोग्राफरों द्वारा मंदिर परिसर में उपद्रव करने, श्रद्धालुओं से जबरन पैसे मांगने और विरोध करने वालों के साथ मारपीट तक करने को लेकर कोष में गंभीर सवाल उठाए गए थे। श्रद्धालुओं के साथ मारपीट और ठगी के संबंध में कोष और स्थानीय पुलिस चौकी में बार-बार शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन उच्च स्तरीय पहुंच के कारण कोष के प्रशासनिक प्रमुख और अधिकारियों ने चुप्पी साधे रखी और कोई कार्रवाई नहीं की।
बुढासुब्बा डिजिटल के साथ भेदभाव और राजन गुरुंग की धमकी
इसी बीच, वर्ष 2023 (11 भदौ 2080 वि.सं.) में, कोष ने बुढासुब्बा डिजिटल प्रा. लि. (प्रबंधक: नवराज गिरि) के साथ बागमती पार होने वाली गंगा आरती के सीधे प्रसारण (लाइव), कोर एरिया/रुद्रगाडेश्वर में दीप प्रज्वलन व वीडियो शूट और डिजिटल प्रबंधन के लिए 5 साल का आधिकारिक समझौता किया, जिसके तहत मूल्य वर्धित कर (VAT) को छोड़कर 1,60,000 रुपये (कुल 1,80,800 रुपये) प्रति माह भुगतान तय किया गया था।
हालांकि बुढासुब्बा डिजिटल ने धरोहर (सिक्योरिटी डिपॉजिट) और बैंक गारंटी के रूप में कोष के खाते में करोड़ों रुपये जमा किए, लेकिन कोष ने उस कंपनी को स्वीकृत दरें उपलब्ध नहीं कराईं और आधिकारिक कार्य आदेश (वर्क ऑर्डर) भी रोक कर रखा। इसके विपरीत, भालेश्वर प्रा. लि. बिना किसी स्वीकृत दर के समझौते का सीधे उल्लंघन करते हुए अवैध रूप से पैसे वसूलता रहा।
साउन मसान्त 2083 वि.सं. में भालेश्वर प्रा. लि. का अनुबंध समाप्त होने के बाद, राजन गुरुंग के समूह ने बुढासुब्बा डिजिटल के सामने प्रस्ताव रखा कि या तो वह उन्हें अपने समझौते में हिस्सा दे या दैनिक भुगतान करे। इस अवैध मांग को खारिज करने पर काम न करने देने की धमकी देते हुए गुरुंग के कैमरा ऑपरेटरों ने बुढासुब्बा के लिए तय क्षेत्र में घुसकर काम में बाधा पहुंचाना शुरू कर दिया। जब बुढासुब्बा ने कार्यस्थल पर समन्वय और सुविधा की मांग करते हुए कोष को लिखित आवेदन दिया, तो कोष के प्रशासनिक अधिकारी ने गैर-जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए "आपस में मिलकर चलने" की सलाह दी, जिससे एक तरह से गुंडागर्दी और वसूली को ही बढ़ावा मिला।
15 वैशाख का गुप्त फैसला और 18 भदौ का रद्द पत्र
पशुपति क्षेत्र विकास कोष संचालन परिषद के 15 वैशाख 2083 वि.सं. के फैसले द्वारा मंदिर क्षेत्र में फोटो और वीडियो लेने के लिए किए गए सभी समझौतों को रद्द करने का निर्णय लिया गया था। लेकिन कोष ने विवादित भालेश्वर प्रा. लि. और राजन गुरुंग का अनुबंध काल (साउन मसान्त 2083 वि.सं.) समाप्त होने तक इस फैसले को सार्वजनिक नहीं किया।
जब भालेश्वर की अवधि समाप्त हो गई और बुढासुब्बा ने गुरुंग के अवैध पैसों के प्रस्ताव को ठुकरा दिया, तब जाकर कोष ने 18 भदौ 2083 वि.सं. को कार्यवाहक शाखा प्रमुख सूर्य बहादुर भट्ट के हस्ताक्षर से 15 वैशाख के फैसले का हवाला देते हुए बुढासुब्बा डिजिटल प्रा. लि. को अनुबंध रद्द करने का पत्र थमा दिया।
कोष के दोहरे मापदंड और मंशा पर सवाल
परिषद का 15 वैशाख का फैसला मुख्य रूप से फोटो/वीडियो शूट से जुड़े समझौतों को रद्द करने के संबंध में था। लेकिन बुढासुब्बा डिजिटल की मुख्य जिम्मेदारी कोष क्षेत्र में दीप प्रज्वलन करने, शाम की गंगा आरती का विश्वभर में सीधा प्रसारण करने और पशुपति क्षेत्र के बारे में होने वाले भ्रामक प्रचार पर लगाम लगाने की थी।
मासिक लगभग 2 लाख रुपये का राजस्व चुकाने वाली और बैंक गारंटी जमा करने वाली संस्था बुढासुब्बा को आज तक कार्य आदेश दिए बिना अचानक अनुबंध रद्द करने का पत्र थमाना स्पष्ट करता है कि कोष के अधिकारी राजन गुरुंग के गिरोह को संरक्षण देने और बुढासुब्बा को पशुपति क्षेत्र से बाहर करने पर आमादा थे।
श्रद्धालुओं के साथ मारपीट करने, किराया और जमानत राशि न चुकाने और अवैध वसूली का धंधा चलाने वाले भालेश्वर प्रा. लि. और राजन गुरुंग पर कार्रवाई करने के बजाय, नियमों और प्रक्रियाओं के तहत काम करने का प्रयास करने वाली संस्था को नियतवश खदेड़ने का कोष के अधिकारियों का यह कदम भगवान पशुपतिनाथ की गरिमा और पवित्रता पर गंभीर आघात है।