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01 Feb, 2026, Sunday
यात्रा

पोखरा में एयरपोर्ट बना, पर्यटक नहीं आए: 40 हजार होटल कमरे खाली

बीआरआई से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और अधूरी उम्मीदों का पर्यटन संकट

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Super Admin | 2026 January 30, 11:42 AM
सारांश AI
• पोखरा में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनने से होटल निवेश तेज़ हुआ।
• लेकिन नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू न होने से 40 हजार कमरे खाली हैं।
• ऋण, अनियमितता और कूटनीतिक बाधाओं ने पर्यटन संकट गहरा दिया है।

नेपाल के प्रमुख पर्यटन शहर पोखरा में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के सपने ने होटल निवेश को नई दिशा दी, लेकिन ज़मीनी हकीकत उम्मीदों से बिल्कुल अलग साबित हुई। आज शहर में 1,000 से अधिक होटल और लगभग 40,000 पर्यटक-स्तरीय कमरे मौजूद हैं, पर उन्हें भरने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्री अब तक नहीं पहुंचे।

यह होटल विस्तार पोखरा क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से जुड़ा था, जिसे 2013 में चीन की CAMC इंजीनियरिंग के साथ समझौते और चीन के एक्सपोर्ट–इंपोर्ट बैंक से 216 मिलियन डॉलर के ऋण पर विकसित किया गया। बाद में यह परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का हिस्सा बनी।

हालांकि, निर्माण के साथ ही परियोजना और वास्तविक संचालन क्षमता के बीच अंतर सामने आने लगा। लगातार सरकारों ने इसे आर्थिक इंजन बताया, जो सालाना लगभग 3 लाख यात्रियों के सहारे खुद का खर्च निकाल सकेगा, लेकिन संसदीय जांच और नियामक रिपोर्टों ने गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा किया।

जांच में सामने आया कि अनुमानित 170 मिलियन डॉलर की लागत बढ़कर 244 मिलियन डॉलर से अधिक हो गई। इसमें बढ़े हुए परामर्श शुल्क और कमजोर खरीद प्रक्रियाओं की भूमिका बताई गई, जिनमें कई अधिकारी और ठेकेदार शामिल थे।

तकनीकी और कूटनीतिक बाधाएं भी सामने आईं। भारत द्वारा अनुकूल हवाई मार्ग की अनुमति न मिलने से उड़ानों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ा। इसके अलावा रनवे की लंबाई और भार सीमा के कारण लंबी दूरी के बड़े विमानों का संचालन संभव नहीं हो सका।

जनवरी 2023 में उद्घाटन के बाद से हवाई अड्डा नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को आकर्षित करने में विफल रहा है। मौजूदा चार्टर और सीमित सेवाएं होटल क्षमता के अनुरूप यात्रियों को लाने में नाकाफी हैं।

वित्तीय आंकड़े बताते हैं कि हवाई अड्डे की आय बेहद कम है, जबकि सालाना ऋण भुगतान लगभग 840 मिलियन नेपाली रुपये तक पहुंचता है। इसी दबाव में ऋण पुनर्गठन के लिए कूटनीतिक प्रयास किए गए, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकल पाया है।

2025 के अंत में भ्रष्टाचार मामलों में कई अधिकारियों पर आरोप लगने के बाद परियोजना को लेकर स्थानीय विश्वास और कमजोर हुआ। कुल मिलाकर, पोखरा का पर्यटन क्षेत्र आज अधूरी उड़ानों और खाली होटलों के साथ उस जोखिम का सामना कर रहा है, जो अव्यवहारिक योजना और कमजोर शासन से पैदा होता है।

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