नेपाल के प्रमुख पर्यटन स्थल फेवा झील को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए पोखरा महानगरपालिका ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर अमल करना शुरू कर दिया है। तकनीकी टीम द्वारा 18 महीने के गहन शोध के बाद झील के जल स्तर का निर्धारण कर सीमांकन का कार्य पूरा कर लिया गया है। इस प्रक्रिया के तहत झील के चारों ओर 1,055 पिलर गाड़ दिए गए हैं, जो भविष्य में झील के संरक्षण के लिए आधार का काम करेंगे।

महापौर धनराज आचार्य ने स्पष्ट किया है कि झील के 65 मीटर के दायरे में आने वाले अतिक्रमण को हटाने की शुरुआत सरकारी भवनों से होगी। इसमें पर्यटन बोर्ड, महानगर शिक्षा कार्यालय और नेपाल पुलिस के परिसर शामिल हैं। इन क्षेत्रों को खाली कर वहां पर्यटन और पर्यावरण के अनुकूल हरित क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। महानगर ने इस पुनर्निर्माण कार्य के लिए विशेष बजट का भी प्रावधान किया है।

मुआवजे और भूमि स्वामित्व को लेकर महानगरपालिका वर्तमान में लगभग 4,500 भूखंडों की जांच कर रही है। 1974 के बाद अवैध रूप से दर्ज की गई भूमि को रद्द करने की तैयारी है, जबकि उससे पहले के वैध भूमि मालिकों को सरकार द्वारा निर्धारित उचित मुआवजा दिया जाएगा। महापौर ने आश्वासन दिया है कि मुआवजे की प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी भी वैध नागरिक को जबरन विस्थापित नहीं किया जाएगा। यह कदम न केवल झील के प्राकृतिक स्वरूप को बहाल करेगा बल्कि क्षेत्र में स्थायी पर्यटन विकास को भी नई दिशा देगा।