नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के संयोजक और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दाहाल 'प्रचंड' ने चेतावनी दी है कि घरेलू और विदेशी प्रतिक्रियावादी ताकतें नेपाल से कम्युनिस्ट आंदोलन को खत्म करने के लिए एक बड़ी योजना पर काम कर रही हैं। रविवार को काठमांडू में आयोजित 26वें निर्मल लामा स्मृति दिवस के अवसर पर उन्होंने कहा कि यदि इस खतरे को स्वीकार कर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह श्रमिक वर्ग के साथ बड़ा विश्वासघात होगा।

प्रचंड ने इस बात पर जोर दिया कि कम्युनिस्ट पार्टियों को सबसे पहले अपनी आंतरिक कमियों की समीक्षा करनी चाहिए और उनमें सुधार करना चाहिए। उनके अनुसार, पूरे कम्युनिस्ट आंदोलन को एक नए तरीके से एकजुट करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है। इसी संदर्भ में उन्होंने नेकपा (मशाल) के महासचिव मोहन विक्रम सिंह से अपील की कि वे वामपंथी एकता को मजबूत करने के लिए एक अभिभावक के रूप में अपनी भूमिका निभाएं।

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देश की संप्रभुता के मुद्दे पर बोलते हुए पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि नेपाल की राष्ट्रीय स्वाधीनता वर्तमान में इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। उनके विश्लेषण के अनुसार, 'जेन-जी' आंदोलन और हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने राष्ट्रीय स्वतंत्रता को संकट में डाल दिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इन नकारात्मक परिस्थितियों के बीच ही एकता की संभावना भी छिपी है, क्योंकि देशभर से देशभक्तों और कम्युनिस्टों के एकजुट होने की आवाज उठ रही है।

वर्तमान सरकार की आलोचना करते हुए प्रचंड ने आरोप लगाया कि मौजूदा प्रशासन गरीब और असहाय नागरिकों को सबसे ज्यादा पीड़ा दे रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा श्रमिक वर्ग पर किए जा रहे हमलों के खिलाफ कम्युनिस्टों को अपनी वर्गीय प्रतिबद्धता के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए। उन्होंने अंत में कहा कि चूंकि नेपाली जनता अभी भी कम्युनिस्ट पार्टियों पर भरोसा करती है, इसलिए नेतृत्व को वर्ग संघर्ष को तेज करने के लिए एकता को अनिवार्य बनाना चाहिए।