नेपाल में नई सरकार बनाने की तैयारी कर रही राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) द्वारा मंत्रालयों की संख्या कम करने के प्रस्ताव के विरोध में महिला और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को माइतीघर में प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि रास्वपा प्रशासन महिला, बच्चे और वरिष्ठ नागरिक मंत्रालय को स्वास्थ्य एवं जनसंख्या मंत्रालय के साथ विलय कर 'स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण मंत्रालय' बनाने की योजना बना रहा है, जो महिलाओं के अधिकारों के लिए बड़ा खतरा है।
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष कमला पराजुली ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि एक बार निर्णय लागू हो जाने के बाद उसे बदलना मुश्किल होता है, इसलिए यह अग्रिम चेतावनी दी जा रही है। उन्होंने तर्क दिया कि देश की ५१ प्रतिशत आबादी, जिसमें महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और दिव्यांग शामिल हैं, उनके हितों की रक्षा करने वाले समर्पित मंत्रालय को खत्म करना अनुचित है। उन्होंने इसे महिला आंदोलन की उपलब्धियों पर प्रहार बताया।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सदस्य लिली थापा ने कहा कि राज्य ने कभी भी महिला मंत्रालय को प्राथमिकता नहीं दी है। उन्होंने बताया कि संविधान बनने के बाद भी इस मंत्रालय को अन्य विभागों में विलय करने की कोशिश की गई थी, जिसे कार्यकर्ताओं के विरोध के बाद रोका गया था। थापा ने आशंका जताई कि मंत्रालय के बाद अगला निशाना महिला आयोग हो सकता है, इसलिए सभी को सतर्क रहने की जरूरत है।
महिला मानवाधिकार रक्षक राष्ट्रीय संजाल की अध्यक्ष श्यामकुमारी साह ने इस कदम को लोकतंत्र और लैंगिक समानता पर हमला करार दिया। प्रदर्शनकारियों ने 'हमारा मंत्रालय, हमारी शान' और '५१ प्रतिशत के अधिकारों से समझौता नहीं' जैसे नारों वाली तख्तियां थामी हुई थीं। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार मंत्रालय को यथावत रखने की आधिकारिक घोषणा नहीं करती, उनका आंदोलन सड़क से लेकर सदन तक जारी रहेगा।