सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के भीतर जारी सांगठनिक गतिरोध के कारण बालेन सरकार में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल की प्रक्रिया फिलहाल थम गई है। दल के भीतर जारी खींचतान के बीच प्रधानमंत्री बालेंद्र (बालेन) शाह ने स्पष्ट किया है कि जब तक पार्टी की केंद्रीय समिति को अंतिम रूप नहीं दे दिया जाता, तब तक सरकार में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

पिछले कुछ हफ्तों से मंत्रिमंडल में व्यापक बदलाव, मंत्रियों की बर्खास्तगी और जांच के दायरे में आने की आशंका से सरकार के भीतर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ था। प्रधानमंत्री शाह और रास्वपा अध्यक्ष रवि लामिछाने के बीच सत्ता के बंटवारे को लेकर आम सहमति न बन पाना इस तनाव की मुख्य वजह थी। हालांकि, नेतृत्व स्तर पर अब यह सहमति बनी है कि शासकीय फैसलों से पहले संगठन के संकट को दूर करना जरूरी है।

विवाद की मुख्य वजह ५१ सदस्यीय केंद्रीय समिति, ११ उच्च पदाधिकारियों और केंद्रीय सचिवालय के चयन को लेकर है। मनोनयन में ५०/५० प्रतिशत की बराबरी या अध्यक्ष के ६०/४० के विशेषाधिकार पर दोनों पक्षों के अड़े रहने से पार्टी के शीर्ष निकाय महीनों से अधूरे हैं। दल के रणनीतिकारों का मानना है कि पार्टी के आंतरिक ढांचे को सुलझाए बिना मंत्रियों को हटाने से सांगठनिक ढांचा चरमरा सकता है।

इस फैसले से पद खोने और कार्रवाई के डर में जी रहे मंत्रियों को अस्थायी राहत जरूर मिली है, लेकिन यह राहत स्थायी नहीं है। पार्टी में जारी समावेशी कोटे और शक्ति संतुलन के हल होते ही मंत्रिमंडल में बड़े पैमाने पर पुनर्गठन तय माना जा रहा है। ऐसे में 'वैकल्पिक राजनीति' की साख को बनाए रखते हुए संगठन की गुत्थी को सुलझाना प्रधानमंत्री बालेन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।