रसुवा की बाढ़ त्रासदी को जोड़कर नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के चेहरे पर कालिख पोतकर और गले में जूतों की माला पहनाई गई फर्जी (Photoshop) तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल की गई है।

'श्रम संस्कृति ओखलढुङ्गा' नामक फेसबुक पेज/ग्रुप के जरिए फैलाई गई यह भ्रामक तस्वीर राजनीतिक असहमति या आलोचना नहीं, बल्कि 'डिजिटल गुंडागर्दी' और घिनौना चरित्र हनन है।

मुख्य प्रश्न:

'श्रम संस्कृति' और बदलाव का नारा देने वाले राजनीतिक समूह या समर्थकों के नाम पर ऐसी असभ्य और विकृत हरकत कौन और किसके उकसावे पर कर रहा है?

राजनीतिक विचारों का विरोध करने के बजाय, फर्जी तस्वीरें और नफरत फैलाकर समाज में किस तरह के संस्कार स्थापित करने की कोशिश की जा रही है?

स्वस्थ आलोचना और चरित्र हनन के बीच अंतर को समझें। सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर फैलाई जाने वाली ऐसी भ्रांतियों और अराजक हरकतों के पीछे कौन सी टीम सक्रिय है, इसकी जांच होनी ही चाहिए!

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