नेपाल की राजनीति में सुशासन के दावों को बड़ा झटका देते हुए सुधन गुरुङ ने एक बार फिर देश के गृह मंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। बिचौलिया दीपक भट्ट के साथ व्यावसायिक संबंध रखने, अघोषित संपत्ति अर्जित करने और अपनी संपत्ति के विवरण में झूठे आंकड़े पेश करने के गंभीर आरोपों के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इन मामलों की जांच के लिए उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अच्युत प्रसाद भंडारी के नेतृत्व में एक विशेष समिति बनाई गई थी। समिति द्वारा अपनी रिपोर्ट सौंपे जाने के ठीक बाद गुरुङ की कैबिनेट में वापसी हुई है, हालांकि इस जांच रिपोर्ट के भीतर के तथ्यों को सरकार ने अब तक सार्वजनिक नहीं किया है।

इस पुनर्नियुक्ति ने उन चिंताओं को सच साबित कर दिया है जहां राजनीतिक रसूखदारों को बचाने के लिए जांच समितियों को महज एक 'वाशिंग मशीन' की तरह इस्तेमाल किया जाता है। गौरतलब है कि जेन-जी (Gen-Z) आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं को लेकर मानवाधिकार आयोग भी गुरुङ को जिम्मेदार ठहरा चुका था। गृह मंत्री के रूप में अपनी वापसी का संकेत गुरुङ ने रविवार को ही गोरखा में आयोजित राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के जिला अधिवेशन के दौरान दे दिया था, जहां उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा था कि यदि वे दोबारा गृह मंत्री बनते हैं, तो कोई भी उनसे दो महीने तक मिलने न आए। इस बयान के ठीक दो दिन बाद उनकी मंत्रालय में वापसी हो गई।

सामने आए तथ्यों के अनुसार, जांच समिति ने दीपक भट्ट की कंपनी के शेयर खरीदने के मामले को व्यावसायिक साझेदारी मानने से इनकार करते हुए गुरुङ को पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया है। इसके अलावा, धनकुटा और चितवन में अत्यधिक ऊंचे मूल्य वाली जमीनों को कम कीमत में खरीदने के आरोपों पर समिति ने इसे व्यक्तिगत दोष न मानकर 'सरकारी व्यवस्था' की खामी करार दिया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि गुरुङ ने कर्ज लेकर शेयर खरीदने की बात मानी थी, लेकिन उनके आधिकारिक संपत्ति विवरण में किसी कर्ज का उल्लेख नहीं था। समिति ने इस गंभीर कानूनी उल्लंघन को एक 'सामान्य मानवीय भूल' मानकर खारिज कर दिया, जिससे भ्रष्टाचार निरोधक कानूनों की प्रासंगिकता कमजोर हुई है।

सरकार के इस कदम ने भविष्य में बिचौलियों और संदिग्ध व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के उसके अपने नैतिक अधिकार को समाप्त कर दिया है। इससे पहले, इसी मामले में दीपक भट्ट से नाम जुड़ने के कारण संपत्ति शुद्धीकरण अनुसंधान विभाग के तत्कालीन महानिदेशक गजेंद्र ठाकुर और वित्त मंत्रालय के कई अधिकारियों का तबादला कर दिया गया था। अब गुरुङ को क्लीनचिट मिलने से उन अधिकारियों पर की गई कार्रवाई पूरी तरह अनुचित साबित होती है। साथ ही, बिना कोई टैक्स चुकाए और पैन (PAN) विवरण खाली रखकर अकूत संपत्ति बनाने की प्रवृत्ति को इस फैसले से वैधानिकता मिल गई है, जो देश की कर प्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए एक बेहद खतरनाक नजीर है।