तमिलनाडु की नवनिर्वाचित सरकार ने ग्रामीण संकट को दूर करने की दिशा में एक बड़ा कल्याणकारी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की अध्यक्षता में सोमवार को हुई बैठक के बाद सहकारी बैंकों से लिए गए कृषि ऋणों को माफ करने का ऐलान किया गया है। इस वित्तीय पैकेज के जरिए राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में सीधे ₹2,044.46 करोड़ का निवेश करने जा रही है।
आधिकारिक विवरण के अनुसार, इस राहत योजना का ढांचा ऋण राशि के आधार पर बेहद व्यवस्थित तरीके से तैयार किया गया है। ₹50,000 तक का कर्ज लेने वाले सीमांत किसानों की पूरी देनदारी समाप्त कर दी जाएगी। वहीं, इसी श्रेणी में आने वाले छोटे किसानों का आधा यानी 50 प्रतिशत कर्ज माफ करने का प्रावधान किया गया है।
सरकार की नीति के तहत कर्ज की रकम बढ़ने के साथ ही माफी का अनुपात कम होता जाएगा। जिन सीमांत किसानों पर ₹50,000 से ₹60,000 के बीच का बकाया है, उन्हें ₹40,000 की छूट मिलेगी, जबकि छोटे किसानों को ₹20,000 की राहत दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, ₹1 लाख से अधिक का कर्ज लेने वाले छोटे, सीमांत और अन्य बड़े पैमाने के सभी किसानों के लिए ₹5,000 की एकसमान वित्तीय छूट तय की गई है।
राज्य के सहकारिता विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, इस विशेष योजना से कुल 14,22,555 किसानों को सीधा आर्थिक लाभ पहुंचेगा। इसके अंतर्गत केवल उन्हीं कृषि ऋणों को शामिल किया गया है जो 1 मई 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच आवंटित किए गए थे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण उत्पादकों को संस्थागत ऋण के जाल से मुक्त करना है।
मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व में उठाया गया यह कदम राज्य की कृषि नीति में एक बड़े बदलाव को रेखांकित करता है। किसानों के वित्तीय बोझ को कम करके, प्रशासन आगामी फसलों के मौसम के लिए ग्रामीण इलाकों में एक मजबूत और सुरक्षित आर्थिक आधार तैयार करने की दिशा में अग्रसर है।