सीपीएन-यूएमएल के महासचिव शंकर पोखरेल ने नेपाल की वर्तमान सरकार और नए उभरते राजनीतिक दलों पर सुशासन के नाम पर जनता को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया है।

पोखरेल ने स्पष्ट किया कि सुशासन का दावा करने वाले मंत्री स्वयं अपनी संपत्ति का विवरण सार्वजनिक करने से बच रहे हैं। उन्होंने सत्ता पक्ष पर पारदर्शिता के बुनियादी मानकों की अनदेखी करने का सीधा आरोप लगाया।

संसद के अध्यक्ष की संपत्ति पर सवाल उठाते हुए यूएमएल नेता ने कहा कि एक मजदूर से मालिक बनना कोई अपराध नहीं है और यह एक अच्छी बात है। हालांकि, उन्होंने विदेश से अर्जित संपत्ति के स्रोत, धन लाने के माध्यम और राज्य को कर भुगतान की स्थिति पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मांग की।

उन्होंने चेतावनी दी कि सुशासन केवल दूसरों को डराने का साधन नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे स्वयं पर भी लागू करना चाहिए। पोखरेल ने चुनौती दी कि यूएमएल के नेता किसी भी प्रकार की वित्तीय जांच का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, और पूछा कि क्या नए राजनीतिक दल भी इस तरह की अग्निपरीक्षा के लिए प्रस्तुत होंगे।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने कार्की आयोग को राजनीतिक प्रतिशोध का एक हथियार बताया। उनका दावा है कि इस आयोग का उपयोग केवल यूएमएल अध्यक्ष केपी शर्मा ओली को परेशान करने के लिए किया जा रहा है, जिसका उनकी पार्टी कड़ा विरोध करेगी।

सुशासन और संपत्ति विवरण को लेकर उठा यह नया राजनीतिक विवाद नेपाल की राजनीति में पारदर्शिता को लेकर एक बड़ी बहस को जन्म दे सकता है, जिससे आने वाले दिनों में सरकार पर दबाव बढ़ना तय है।