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01 Feb, 2026, Sunday
अपराध

2026 में संगठित अपराध को नया रूप दे रही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

साइबर हमलों से लेकर ड्रोन तक, एआई के बढ़ते उपयोग से नई चुनौतियां

Super Admin
Super Admin | 2026 January 30, 01:54 PM
सारांश AI
• 2026 में एआई के फैलाव से संगठित अपराध की रणनीतियाँ तेज़ी से बदल रही हैं।
• साइबर अपराध, आवाज़/चेहरे की नकल और स्वायत्त ड्रोन नए जोखिम बढ़ा रहे हैं।
• सरकारें एआई से मुकाबला कर रही हैं, लेकिन नागरिक अधिकारों पर चिंता भी बढ़ी है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विस्तार के साथ संगठित अपराध की प्रकृति तेज़ी से बदल रही है। एआई तकनीक अब अपराधी नेटवर्क और सरकारी एजेंसियों—दोनों के लिए रणनीतिक हथियार बन चुकी है।

साइबर अपराध में एआई ने सबसे बड़ा असर डाला है। भाषा-आधारित एआई मॉडल्स ने कोड लिखना आसान बना दिया है, जिससे कम अनुभव वाले लोग भी हानिकारक सॉफ्टवेयर बना पा रहे हैं। अनुभवी साइबर अपराधी एआई की मदद से सुरक्षा खामियों को तेज़ी से खोज रहे हैं।

पारंपरिक अपराध भी अब एआई से जुड़े हैं। कुछ देशों में अपराधी गिरोह आवाज़ की नकल कर अपहरण की झूठी कॉल से फिरौती वसूल रहे हैं। चेहरे की नकल करने वाली एआई तकनीक ने बायोमेट्रिक सुरक्षा प्रणालियों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ड्रोन तकनीक में एआई का प्रयोग अपराध को और घातक बना रहा है। निगरानी और हमलों के लिए इस्तेमाल होने वाले स्वायत्त ड्रोन सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन गए हैं। यूरोपीय एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि सस्ते, एआई-सक्षम ड्रोन आपराधिक और आतंकवादी उपयोग के लिए फैल सकते हैं।

सरकारें भी एआई को अपराध से लड़ने के लिए अपना रही हैं—तस्करी, अवैध खनन और भ्रष्टाचार की पहचान में इसका प्रयोग बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुटेरेस के अनुसार, एआई जहां भ्रष्टाचार को तेज़ कर सकती है, वहीं उसे उजागर करने में भी मददगार हो सकती है।

लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जल्दबाज़ी में अपनाई गई तकनीकें नागरिक अधिकारों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। गलत चेहरे की पहचान से निर्दोष लोगों की गिरफ्तारी ने कई देशों में भरोसे का संकट पैदा किया है।

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