नेपाल के बैतडी जिले के दशरथचन्द नगरपालिका-4, देवलहाट में स्थित प्रसिद्ध पंचदेवल शिव धाम अपनी धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ एक विशेष तांबे के नंदी (साढे) के लिए जाना जाता है। इस स्थान से जुड़ी सदियों पुरानी कहानी आज भी श्रद्धालुओं के बीच श्रद्धा का केंद्र बनी हुई है।
ऐतिहासिक वृत्तांतों के अनुसार, राणा शासन के दौरान इस क्षेत्र में भीषण सूखा पड़ा था। स्थानीय लोगों का मानना था कि भगवान शिव की उपासना ही इस संकट का समाधान है। इसी विश्वास के साथ तत्कालीन जिला गवर्नर (बडाहाकिम) नील विक्रम राणा ने इस धाम में विशेष पूजा-अर्चना की थी। शुरुआत में बारिश न होने पर गवर्नर ने भगवान की शक्ति पर संदेह करते हुए एक विवादित टिप्पणी की थी।
आश्चर्यजनक रूप से, जब वह वापस लौट रहे थे, तब अचानक मूसलाधार बारिश शुरू हो गई, जिससे उनका रास्ता रुक गया। इस घटना ने गवर्नर को अपनी गलती का एहसास कराया और उन्होंने शिव धाम की दिव्यता को स्वीकार किया। इसी भक्ति और पश्चाताप के प्रतीक के रूप में उन्होंने वहां तांबे का नंदी चढ़ाया था।
वर्तमान में भी यह प्रतिमा मंदिर में सुरक्षित है, जो न केवल एक धार्मिक वस्तु है बल्कि क्षेत्र के इतिहास और आस्था का एक जीता-जागता दस्तावेज भी है। यह स्मारक आज भी स्थानीय संस्कृति में अटूट विश्वास की याद दिलाता रहता है।