प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बुद्ध जयंती के अवसर पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि एक वास्तविक क्रांति की शुरुआत भौतिक संघर्षों से नहीं बल्कि 'ज्ञ' अर्थात ज्ञान से होती है। उनके अनुसार, समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए बौद्धिक जागृति सबसे महत्वपूर्ण हथियार है।
भगवान बुद्ध द्वारा बताए गए चार आर्य सत्यों—दुख, दुख का कारण और उसके निवारण—का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बुद्ध का मार्ग वास्तव में कष्टों से मुक्ति का मार्ग है। उन्होंने अंधकार को प्रकाश का अभाव बताते हुए कहा कि जैसे ही ज्ञान की किरणें आती हैं, अज्ञानता और समस्याएं स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं।
नेपाल की पावन भूमि को बुद्ध का जन्मस्थल बताते हुए उन्होंने गर्व व्यक्त किया कि यह राष्ट्र सदैव अहिंसा और शांति के सिद्धांतों का समर्थक रहा है। उन्होंने विश्व शांति की कामना की और देशवासियों को बुद्ध के दिखाए गए प्रज्ञा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में 'अप्प दीपो भव' के महामंत्र को दोहराते हुए सभी से अपना दीपक स्वयं बनने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारी खोज हमेशा ज्ञान के प्रकाश और समस्याओं के समाधान की दिशा में होनी चाहिए।
बुद्ध जयंती के इस पावन पर्व पर उन्होंने सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए भविष्य में एक ज्ञानवान और शांतिपूर्ण समाज के निर्माण की आशा व्यक्त की।