थापाथली स्थित बागमती किनारे की झुग्गी बस्ती को हटाने की सरकार की अंतिम तैयारियों के बीच इस क्षेत्र की एक और सच्चाई सामने आई है। बाहर से देखने पर भले ही यह वर्षों से जड़ जमाए हुए स्थायी अतिक्रमण जैसा दिखता हो, लेकिन अंदर ईसाई धर्मावलंबियों की घनी उपस्थिति और एक अलग प्रणाली का संचालन पाया गया है। इस बस्ती के भीतर चर्च स्थापित किया गया है और यहाँ मुख्य रूप से ईसाई धर्म को मानने वाले लोग निवास करते हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह बस्ती न केवल स्थायी निवास का स्थान है, बल्कि एक 'ट्रांजिट' या अस्थायी आश्रय स्थल के रूप में उपयोग की जा रही है। नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों से गरीब और विपन्न नागरिकों को लाकर इस बस्ती में रखा जाता है। यहाँ लाए गए लोगों को विभिन्न सहायता और मार्गदर्शन प्रदान कर आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जाता है। जब वे अपने पैरों पर खड़े होने में सक्षम यानी आत्मनिर्भर हो जाते हैं, तो उन्हें बस्ती से विदा कर समाज में भेज दिया जाता है। एक समूह को समाज में पुनर्स्थापित करने के बाद, उसी खाली जगह पर फिर से अन्य नए विपन्न लोगों को लाकर रखा जाता है।
गरीबों को आश्रय देकर आत्मनिर्भर बनाने और समाज में भेजने का यह चक्र लंबे समय से निरंतर चल रहा है। इस कारण इस क्षेत्र में अधिकांश लोग स्थायी रूप के बजाय केवल अस्थायी रूप से ही रहते हैं। अतीत में इसी बस्ती में आश्रय लेकर आत्मनिर्भर बने और वर्तमान में काठमांडू के विभिन्न स्थानों पर बिखरे हुए रहने वाले लोगों की संख्या काफी अधिक है।