काठमांडू। आयात पर पूरी तरह से निर्भर नेपाल में सरकार द्वारा सीमा शुल्क (कस्टम) निकासी पर अत्यधिक सख्त नीति लागू किए जाने के बाद देश भर में महंगाई बेतहाशा बढ़ गई है। नई नीतियों के कारण नेपाल-भारत सीमा के कस्टम नाकों पर मालवाहक वाहनों का भारी ट्रैफिक जाम लग गया है, वहीं घरेलू बाजार में उपभोक्ता वस्तुओं की कमी और मूल्य वृद्धि ने आम जनता की कमर तोड़ दी है।

कस्टम नाकों की स्थिति और बुनियादी ढांचे का अभाव

सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए अनिवार्य एमआरपी (MRP) नियम और सीमा पार खरीदारी पर 100 रुपये से अधिक के सामान पर कस्टम ड्यूटी चुकाने के प्रावधान ने सीमा चौकियों पर अफरा-तफरी मचा दी है। आयातक और दैनिक यात्री इससे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

नेपाल-भारत सीमा पर विभिन्न प्रकार के सीमा शुल्क कार्यालय हैं। इन चौकियों पर बुनियादी ढांचे के स्तर में काफी भिन्नता है। बीरगंज, विराटनगर और भैरहवा जैसे कस्टम कार्यालय पूरी तरह से सुसज्जित एकीकृत चेक पोस्ट (ICPs) के रूप में काम करते हैं और भारी व्यावसायिक कार्गो (माल) संभालते हैं, जबकि अन्य चौकियां छोटे कस्टम स्टेशनों के रूप में संचालित होती हैं जो मुख्य रूप से स्थानीय सीमा व्यापार और दैनिक यात्रियों की सेवा करती हैं। बुनियादी ढांचे की कमी और नए नियमों की परेशानी के कारण अब छोटे से लेकर बड़े सभी नाकों पर माल रोके जाने का सिलसिला बढ़ गया है।

1:3 के अनुपात में महंगाई और घटती क्रय शक्ति

सीमा क्षेत्र में कार्यरत पत्रकारों के अनुसार, कस्टम की सख्ती के बाद बाजार में महंगाई असामान्य रूप से 1:3 के अनुपात में (तीन गुना) बढ़ गई है। वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें आसमान छू रही हैं लेकिन लोगों की आय स्थिर है।

इसके चलते आम जनता की क्रय शक्ति (Purchasing Power) में भारी गिरावट आई है। सरकार के इस सख्त नियम को लेकर नागरिकों में भारी असंतोष है। एक तरफ भारतीय सीमावर्ती बाजार (जैसे: रुपईडीहा) सुनसान हो गए हैं, तो दूसरी तरफ नेपाल के भीतर सामान इतना महंगा हो गया है कि उसे खरीदा नहीं जा सकता।

राजधानी में ही एक दर्जन केले की कीमत 400 रुपये!

काठमांडू के निवासी दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतों में हुई अकल्पनीय वृद्धि की कड़ी शिकायत कर रहे हैं। बाजार की स्थिति कितनी भयावह है, यह आम फलों की कीमत से पता चलता है। काठमांडू में केले की कीमत चार गुना बढ़कर लगभग 400 रुपये प्रति दर्जन हो गई है। यह तो बाजार का सिर्फ एक प्रातिनिधिक उदाहरण है, खाद्यान्न से लेकर कपड़ों तक हर सामान की कीमत इसी तरह आसमान छू रही है।

"बालेन सरकार की अघोषित नाकेबंदी"

नेपाल का घरेलू उत्पादन अपने सभी नागरिकों की जरूरतों को पूरा करने की स्थिति में नहीं है। देश की अर्थव्यवस्था और दैनिक जीवन पूरी तरह से आयात पर निर्भर है।

इस हकीकत को नजरअंदाज करते हुए, बिना किसी पूर्व तैयारी और व्यावहारिक विकल्प के कस्टम पर की गई सख्ती को आम नागरिकों ने "बालेन सरकार द्वारा लगाई गई अघोषित नाकेबंदी" के रूप में देखना शुरू कर दिया है। आम जनता की शिकायत है कि बाजार विनियमन और राजस्व संग्रह के नाम पर लाई गई इस नीति ने अंततः अपने ही देश के नागरिकों को भुखमरी की कगार पर पहुंचा दिया है।