खोटांग के एक सुदूर गांव से भारत में 3 करोड़ ग्राहकों का साम्राज्य खड़ा करने तक: दीपेश कार्की की जिंदगी बदलने वाली वह एक स्कॉलरशिप!
खोटांग के एक दुर्गम गांव में जन्मे दीपेश कार्की ने आज भारत के वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) क्षेत्र में एक बड़ा साम्राज्य स्थापित कर लिया है। नेपाल स्थित भारतीय दूतावास के साथ अपने संघर्ष और सफलता के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वे भारत के अग्रणी 'पीयर-टू-पीयर' (व्यक्ति से व्यक्ति) ऋण मंच 'लेनदेनक्लब' (LenDenClub) के सह-संस्थापक बनने में सफल रहे हैं। वर्तमान में उनकी यह कंपनी 3 करोड़ से अधिक ग्राहकों को सेवाएं दे रही है, जो कभी एक सुदूर गांव के निवासी के लिए सपनों से भी परे की बात थी।
खोटांग के हौचुर में एक सामान्य शिक्षक परिवार में जन्मे दीपेश का बचपन संघर्षों से भरा था। माता-पिता दोनों शिक्षक होने के बावजूद, परिवार की जरूरतें पूरी करने और बेटों को पढ़ाने के लिए उन्हें खेती-बाड़ी भी करनी पड़ती थी। बचपन से ही गैजेट्स और मशीनों में रुचि रखने वाले दीपेश पायलट या एयरोनॉटिकल इंजीनियर बनना चाहते थे, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति आड़े आ गई। उनके जीवन में साल 2007-08 में तब बड़ा बदलाव आया, जब उन्हें 'कॉम्पेक्स' (COMPEX) छात्रवृत्ति मिली। इस कठिन परीक्षा में 20वां स्थान हासिल करते हुए उन्होंने भारत के प्रतिष्ठित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT), कुरुक्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए पूर्ण छात्रवृत्ति प्राप्त की।
एनआईटी कुरुक्षेत्र के शैक्षणिक माहौल, उन्नत प्रयोगशालाओं और कॉलेज की विभिन्न गतिविधियों में निभाई गई नेतृत्वकारी भूमिका से मिले कौशल ने दीपेश को एक उद्यमी बनने की नींव दी। कॉलेज पूरा करने के बाद, उन्होंने शुरुआत में 'पाइपआइसो' (PipeIso) नामक एक इंजीनियरिंग सॉफ्टवेयर कंपनी शुरू की, जहां उन्होंने यह व्यावहारिक सबक सीखा कि तकनीक बनाने से कहीं ज्यादा मुश्किल उसे बाजार में बेचना है। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और मुंबई में अपने व्यावसायिक साझेदार भाविन पटेल के साथ मिलकर 'लेनदेनक्लब' की शुरुआत की।
आश्चर्य की बात यह है कि आज करोड़ों का डिजिटल टर्नओवर करने वाले 'लेनदेनक्लब' की स्थापना की प्रेरणा दीपेश को अपने ही गांव खोटांग से मिली थी। उनके पैतृक गांव में बैंक न होने के कारण लोग कर्ज, इलाज और खेती-बाड़ी के लिए आपसी भरोसे और समुदाय पर निर्भर रहते थे। आपसी संबंधों और विश्वास पर आधारित नेपाली गांव की इसी पारंपरिक अवधारणा को उन्होंने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके डिजिटल वित्तीय मंच में बदल दिया, जिसे भारत में बेहद पसंद किया गया।
भारत सरकार की डिजिटल पहचान प्रणाली, वित्तीय समावेशन और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की प्रगतिशील नीतियों ने उनकी कंपनी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जटिल समस्याओं को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर समाधान खोजना ही सफलता का रहस्य मानने वाले कार्की वर्तमान में नेपाल-भारत तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने में जुटे हैं। उनका दृढ़ विश्वास है कि नेपाल को केवल सगरमाथा (माउंट एवरेस्ट) और बुद्ध के देश के रूप में ही नहीं, बल्कि विश्व स्तरीय उद्यमियों और शोधकर्ताओं को जन्म देने वाले राष्ट्र के रूप में भी दुनिया भर में पहचान मिलनी चाहिए।
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