काठमांडू - भारत और फ्रांस के बीच लड़ाकू विमानों के लिए अत्याधुनिक इंजन विकास तथा उत्पादन में सहयोग ने नए चरण में प्रवेश किया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया के अनुसार फ्रांस की सफ्रान (Safran) और भारत के गैस टर्बाइन रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (GTRE) के बीच की संयुक्त परियोजना को आवश्यक सरकारी मंजूरी मिलने के साथ ही इसके क्रियान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है।
प्रकाशित विवरण के अनुसार इस सहयोग के माध्यम से आधुनिक लड़ाकू विमानों के लिए उच्च क्षमता वाली इंजन तकनीक विकास, उत्पादन क्षमता विस्तार तथा तकनीकी सहायता को प्राथमिकता दी जाएगी। इस परियोजना से भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को और मजबूत करने का विश्वास व्यक्त किया गया है।
विश्लेषकों के अनुसार अत्याधुनिक लड़ाकू विमान इंजन विकास दुनिया की सबसे जटिल रक्षा तकनीकों में से एक माना जाता है। इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग तकनीकी दक्षता वृद्धि, अनुसंधान एवं विकास में निवेश विस्तार और दीर्घकालिक औद्योगिक क्षमता निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की भारत की रणनीति के अनुसार हाल के वर्षों में देश में ही उन्नत सैन्य उपकरणों का निर्माण करने के प्रयासों में तेजी लाई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार इंजन तकनीक में हासिल होने वाली प्रगति से भविष्य में स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रमों को भी बल मिल सकता है।
भारत–फ्रांस रक्षा सहयोग हाल के वर्षों में लगातार विस्तार प्राप्त कर रहा है। दोनों देशों के बीच रक्षा तकनीक, अनुसंधान तथा औद्योगिक साझेदारी को और मजबूत करने का प्रयास जारी रहने का उल्लेख अंतरराष्ट्रीय विश्लेषणों में किया गया है।