पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में सरकार द्वारा एक प्रमुख नागरिक आंदोलनकारी संगठन पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद पूरे क्षेत्र में भारी तनाव और मानवाधिकार संकट पैदा हो गया है। प्रतिबंधित संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) द्वारा बुलाई गई आम हड़ताल के कारण क्षेत्र के मुख्य शहर पूरी तरह ठप हो गए हैं, जबकि बड़े पैमाने पर की जा रही गिरफ्तारियों और इंटरनेट निलंबन ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

क्षेत्रीय सरकार ने पिछले सप्ताह जेएएसी को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंधित घोषित कर दिया था। इसके बाद, संगठन के शीर्ष नेताओं के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया है और कुछ नेताओं की गिरफ्तारी पर नकद इनाम की घोषणा भी की गई है।

इस पूरे विवाद के केंद्र में आगामी २७ जुलाई को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए आरक्षित की गई १२ सीटें हैं। ये सीटें पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहने वाले कश्मीरी शरणार्थियों के लिए निर्धारित की गई हैं, जिसका जेएएसी यह कहकर विरोध कर रहा है कि इससे स्थानीय निवासियों के राजनीतिक अधिकार और प्रतिनिधित्व कमजोर होंगे।

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तनाव उस समय हिंसक रूप ले चुका था जब पिछले रविवार को रावलकोट क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़प में कम से कम ११ लोगों की मौत हो गई। इसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था सख्त करते हुए कई शहरों में इंटरनेट सेवाएं ठप कर दी हैं और सैकड़ों कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया है।

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस पूरी कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की है। संस्था ने इसे मानवाधिकारों की स्थिति पर एक गंभीर प्रहार बताते हुए कहा है कि नागरिक समूहों को आतंकवादी घोषित करना, इंटरनेट बंद करना और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां करना अभिव्यक्ति और संगठन की स्वतंत्रता का खुला उल्लंघन है।

दूसरी ओर, स्थानीय लोगों और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पाकिस्तान विरोधी नहीं हैं, बल्कि केवल अपने क्षेत्रीय अधिकारों और उचित प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम ने क्षेत्रीय स्वायत्तता और केंद्र-प्रांत संबंधों से जुड़ी पुरानी नाराजगी को फिर से उजागर कर दिया है, जिससे आगामी चुनावों से पहले स्थिति के और अधिक जटिल होने की संभावना है।