देश में बढ़ते सामाजिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण पर चिंता जताते हुए विशेषज्ञों ने सचेत किया है कि राष्ट्रीय एकता केवल भव्य स्मारकों या औपचारिक भाषणों से हासिल नहीं की जा सकती। अखिल भारतीय किसान महासंघ (आईफा) के राष्ट्रीय संयोजक एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था विशेषज्ञ डॉ. राजाराम त्रिपाठी द्वारा जारी गहन विश्लेषण के अनुसार, भाषा, धर्म, जाति और क्षेत्र के नाम पर की जा रही संकीर्ण राजनीति भारत की आंतरिक एकजुटता को गहराई से नुकसान पहुंचा रही है।
स्वतंत्रता के पश्चात 562 से अधिक रियासतों का एकीकरण कर आधुनिक भारत का निर्माण करने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल की विरासत का उल्लेख करते हुए डॉ. त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि सरदार पटेल की गगनचुंबी प्रतिमाएं पर्यटन स्थल तो बन सकती हैं, लेकिन राष्ट्रीय एकता का प्रतीक तभी बनेंगी जब उनके विचारों और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को ईमानदारी से लागू किया जाएगा।
इतिहास के पन्नों को पलटते हुए विश्लेषण में बताया गया है कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में बनी हिंदू-मुस्लिम एकता को तोड़ने के लिए ब्रिटिश हुकूमत ने 1909 के मॉर्ले-मिंटो सुधारों के जरिए पृथक निर्वाचन की विभाजनकारी व्यवस्था लागू की थी। 1947 में माउंटबेटन योजना के तहत हुए देश के विभाजन के दशकों बाद भी, राजनीतिक लाभ के लिए उसी औपनिवेशिक विभाजनकारी मानसिकता को खाद-पानी दिया जा रहा है।
विश्लेषण में पेसा अधिनियम 1996, अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 और आदिवासी भूमि संरक्षण कानूनों के त्रुटिपूर्ण क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ऐतिहासिक शोषण से रक्षा के लिए बने ये कानून प्रशासनिक विसंगतियों के कारण आदिवासियों को उनकी भूमि का उचित मूल्य दिलाने में विफल रहे हैं और सामाजिक तनाव को बढ़ावा दे रहे हैं। इसके साथ ही, छत्तीसगढ़िया बनाम बाहरी जैसे क्षेत्रीय विवादों को खारिज करते हुए कहा गया है कि संविधान का अनुच्छेद 19(1) देश के हर नागरिक को कहीं भी रहने और कार्य करने की स्वतंत्रता देता है।
भारतीय सेना, अखिल भारतीय सेवाओं और सार्वजनिक संस्थानों को राष्ट्रीय एकता की असली ताकत बताते हुए डॉ. त्रिपाठी ने जनप्रतिनिधियों के जवाबदेही तय करने पर जोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय एकता किसी एक दिन के भाषण या शपथ तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह दैनिक आचरण, निष्पक्ष कानून और नागरिकों के परस्पर विश्वास पर निर्भर करती है।