काठमांडू। दियो पोस्ट ऑनलाइन द्वारा प्रधान न्यायाधीश और एक सांसद का नाम अमेरिका में 'रिश्वत' तथा फिक्सर से जोड़कर समाचार प्रकाशित करने के बाद उत्पन्न विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। इस खबर पर सर्वोच्च अदालत के प्रधान न्यायाधीश डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्पष्ट किया है कि समाचार में उल्लिखित व्यक्तियों और संदर्भों से उनका कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध, परिचय या संपर्क नहीं है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उस अवधि के दौरान वह प्रधान न्यायाधीश के पद पर भी नहीं थे। डॉ. शर्मा ने समाचार को निराधार, झूठा और कपोलकल्पित बताते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है।

प्रधान न्यायाधीश का खंडन बयान सार्वजनिक होने के साथ ही पुलिस ने अनामनगर स्थित दियो पोस्ट के कार्यालय पहुंचकर पूछताछ और जांच तेज कर दी है। दलित समुदाय से पत्रकारिता में आए दियो पोस्ट के प्रधान संपादक सुदीप विश्वकर्मा मीडिया क्षेत्र में लगातार विवादास्पद और असंतुलित समाचार प्रकाशित करने वाले पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं। मीडिया जगत में बिना साक्ष्य और संतुलन के मनगढ़ंत लिखने तथा सनकी स्वभाव के लिए आलोचना झेलते रहे विश्वकर्मा पर इस बार राज्य के सर्वोच्च न्यायिक नेतृत्व की छवि को धूमिल करने वाली भ्रामक सामग्री प्रसारित करने का आरोप लगा है।
पत्रकारिता के न्यूनतम मानदंडों और आचार संहिता का उल्लंघन कर समाचार प्रसारित करने के आरोप में पुलिस संपादकीय नेतृत्व को हिरासत में लेकर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी में है। प्रधान न्यायाधीश के बयान और पुलिस की इस कार्रवाई के बाद शुरू हुई पूछताछ तथा धरपकड़ के घटनाक्रम ने इस समय पूरे नेपाली मीडिया जगत में गंभीर बहस और हलचल पैदा कर दी है।