नेपाल के धनुषा निर्वाचन क्षेत्र 2 से 41,637 मत प्राप्त कर प्रतिनिधि सभा सदस्य चुने गए राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के राम विनोद यादव पत्रकार अरुण सिंघानिया हत्याकांड में तीन साल की सजा काट चुके दोषी हैं। धनुषा जिला अदालत और जनकपुर उच्च अदालत ने हत्या के मुख्य साजिशकर्ता संजय साह 'टकला' के प्रमुख सहयोगी के रूप में उनकी संलिप्तता की पुष्टि की थी।

अदालती फैसले के अनुसार 1 मार्च 2010 (होली के दिन) 'जनकपुर टुडे' के प्रकाशक सिंघानिया की हत्या की योजना बनाने, हथियारों का प्रबंध करने और शूटरों को हथियार सौंपने में यादव की मुख्य भूमिका रही थी। नेपाल पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक यादव 1997 से ही मारपीट, पुलिसकर्मियों पर हमले, गोलीबारी और डकैती जैसे संगीन अपराधों में शामिल रहे हैं।

निर्वाचन कानून के तहत सजा पूरी होने के 6 साल बाद चुनाव लड़ने की अनुमति होने के कारण अगस्त 2025 में यह अवधि समाप्त होते ही यादव रास्वपा में शामिल हुए और प्रत्यक्ष चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। कानूनी रूप से योग्य होने के बावजूद सुशासन और कानून के शासन का दावा करने वाली रास्वपा द्वारा एक सजायाफ्ता अपराधी को टिकट दिए जाने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

चुनाव के दौरान रास्वपा उपाध्यक्ष डीपी अर्याल ने यादव के समर्थन में विशेष वीडियो संदेश जारी कर प्रचार किया था। मधेस की राजनीति में मिर्जा दिलशाद बेग, मोहम्मद आफताब आलम और संजय साह टकला जैसे आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं के उभार के बाद यादव की यह जीत राजनीति में अपराध के प्रभाव की पुरानी बहस को फिर से सामने लाती है।