नेपाल आज में दिनांक २०८३.०७.०४ को प्रकाशित खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता अधिकार से संबंधित खोजी सामग्री को लेकर काठमांडू स्थित गौतम स्विट्स ने अपना आधिकारिक खंडन भेजा है। मीडिया और प्रेस काउंसिल नेपाल के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार प्राप्त खंडन को स्थान देते हुए उसमें उठाए गए कानूनी, प्रक्रियात्मक और पत्रकारिता आचार संहिता से जुड़े मुद्दों पर गंभीर संपादकीय समीक्षा की गई है।

प्रेस काउंसिल नियम और अधिकार पत्र की कानूनी समीक्षा

गौतम स्विट्स के संचालक शैलेंद्र शर्मा की ओर से अधिकृत कानूनी प्रतिनिधि दीपक राय द्वारा २०८३.०७.१३ को प्रस्तुत खंडन पत्र में प्रेस काउंसिल अधिनियम २०४८, प्रेस काउंसिल नियमावली २०४९ और पत्रकार आचार संहिता शिकायत एवं कार्रवाई संबंधी कार्यविधि २०७५ के संदर्भ को उद्धृत किया गया है।

प्रचलित कानूनी व्यवस्था के अनुसार किसी भी व्यावसायिक फर्म या व्यक्ति द्वारा कानूनी सलाहकार या प्रतिनिधि के माध्यम से अपना दावा प्रस्तुत करना अथवा मुख्तारनामा/अधिकार देना स्वाभाविक एवं सर्वस्वीकार्य कानूनी अधिकार है। लेकिन, प्रक्रियात्मक दृष्टि से यहाँ एक अनोखी कानूनी त्रुटि दिखाई देती है। संचालक शैलेंद्र शर्मा द्वारा दीपक राय को दिए गए उक्त अधिकार पत्र में कंपनी की आधिकारिक मोहर लगी होने के बावजूद अधिकार दिए जाने की तिथि का उल्लेख नहीं किया गया है। कानूनी दस्तावेजों और अधिकार पत्रों में स्पष्ट तिथि अनिवार्य मानी जाने की स्थिति में तिथिविहीन अधिकार पत्र प्रस्तुत होना प्रक्रियात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण प्रतीत होता है।

नाम परिवर्तन और स्रोत संरक्षण की पत्रकारिता आचार संहिता

टिपटॉप के खंडन पत्र में ऑर्डर करने या अनुभव साझा करने वाले व्यक्तियों के वास्तविक नाम का उल्लेख न करके 'डेल्टा' और 'अल्फा' जैसे नामों का प्रयोग करने पर आपत्ति व्यक्त की गई है।

लेकिन, अंतर्राष्ट्रीय खोजी पत्रकारिता और नेपाल प्रेस काउंसिल की आचार संहिता मीडिया को सूचना देने वाले स्रोतों और आम उपभोक्ताओं की गोपनीयता की रक्षा करने का स्पष्ट अधिकार देती है। व्यावसायिक घरानों या शक्तिशाली पक्षों के खिलाफ अपने कड़वे अनुभव साझा करने वाले आम नागरिकों को सम्भावित मानसिक दबाव, धमकी या कानूनी पचड़ों से बचाने के लिए 'स्रोत की सहमति से' नाम बदलना खोजी पत्रकारिता का सर्वमान्य मानक है। उपभोक्ताओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नाम गुप्त रखा जाना पत्रकारिता की मूल भावना के अनुरूप ही है।

५० लाख रुपये के नुकसान का दावा और वैज्ञानिक प्रमाण की खोज

खंडन पत्र में नेपाल आज में प्रकाशित सामग्री के कारण टिपटॉप को रु. ५०,००,०००।– यानी पचास लाख रुपये के बराबर व्यापारिक नुकसान होने का दावा करते हुए मुआवजे का सवाल उठाया गया है।

मीडिया समीक्षा के दृष्टिकोण से देखने पर ५० लाख रुपये के व्यावसायिक नुकसान का दावा वस्तुनिष्ठ और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित प्रतीत नहीं होता। समाचार प्रकाशित होने के बाद पिछले महीने या पिछले वर्ष की तुलना में बिक्री में कितने प्रतिशत की गिरावट आई? क्या समाचार के कारण ही ग्राहकों ने टिपटॉप आना छोड़ा या इसके अन्य बजारी कारण हैं? इस बारे में कोई ऑडिट रिपोर्ट या लेखा परीक्षा के आंकड़े प्रस्तुत नहीं किए गए हैं। ठोस वित्तीय प्रमाणों और वैज्ञानिक सूचकांकों के बिना अनुमान के आधार पर इतनी बड़ी राशि के नुकसान का दावा किया जाना कानूनी और व्यावसायिक दोनों दृष्टियों से सिद्ध नहीं हो सकता।

अन्य फर्मों का संदर्भ और टिपटॉप की अजीब आपत्ति

नेपाल आज में प्रकाशित समाचार में पठाओ फूड, सुल्तान बिरयानी और संगम स्विट्स की हालिया बासी तथा अखाद्य वस्तुओं से संबंधित घटनाओं की समीक्षा की गई थी, जबकि टिपटॉप को केवल खाद्य सुरक्षा के दशकों पुराने ऐतिहासिक संदर्भ के रूप में ही उद्धृत किया गया था। लेकिन, गौतम स्विट्स द्वारा भेजे गए खंडन पत्र में अपने वर्तमान व्यावसायिक तथ्यों या इतिहास पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय अन्य फर्म या कंपनी के अखाद्य सामान मिलने के संदर्भ को आगे रखते हुए समाचार के अग्रभाग की तस्वीर में अपना लोगो होने पर आपत्ति जताई गई है। किसी दूसरी कंपनी की अखाद्य वस्तुओं और सेवाओं के संदर्भ को लेकर टिपटॉप द्वारा अपने खंडन में रक्षात्मक रुख अपनाना और उसी को मुख्य मुद्दा बनाकर सवाल उठाना पत्रकारिता तथा कानूनी समीक्षा के दृष्टिकोण से काफी अजीब प्रतीत होता है।

ऐतिहासिक संदर्भ और वर्तमान बाजार की वास्तविकता

टिपटॉप ने अपने खंडन में आपत्ति जताई है कि किसी अन्य फर्म या कंपनी के अखाद्य और बासी सामान मिलने के विषय में उसके लोगो और नाम को जोड़कर समाचार के अग्रभाग में रखा गया।

यहाँ स्पष्ट किया जाने वाला मुख्य विषय यह है कि नेपाल आज के पिछले समाचार में टिपटॉप द्वारा हाल ही में बासी या बदबूदार खाना बेचे जाने का कहीं भी दावा नहीं किया गया था। पठाओ फूड, सुल्तान बिरयानी और संगम स्विट्स की हालिया घटनाओं की समीक्षा के क्रम में टिपटॉप को केवल नेपाल की खाद्य सुरक्षा के ऐतिहासिक संदर्भ के रूप में याद दिलाया गया था। दशकों पहले टिपटॉप के समोसे के भीतर चूहा मिलने की चर्चित घटना (जो संदर्भ उस समय के लोकप्रिय हास्य धारावाहिक 'तीतो सत्य' में भी व्यंग्य के रूप में प्रसारित हुआ था) नेपाली उपभोक्ता अधिकारों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दृष्टांत बनी थी।

वर्तमान बाजार की वास्तविकता को देखें तो, उपभोक्ता टिपटॉप के भोजन की न्यूनतम गुणवत्ता के बजाय इसके अत्यधिक मूल्य पर अपने अनुभव और प्रतिक्रियाएं साझा करते हैं। इसलिए पुराने ऐतिहासिक संदर्भों और वर्तमान बाजार मूल्य की बहस को अखाद्य वस्तुओं की बिक्री से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

उपभोक्ता अधिकार, कानूनी उपचार और जिम्मेदार पत्रकारिता

नेपाल आज मीडिया संस्थान हमेशा स्वस्थ बाजार, जिम्मेदार व्यवसाय और उपभोक्ताओं के संवैधानिक अधिकारों के पक्ष में दृढ़ता से खड़ा रहा है। किसी भी पारंपरिक या बड़े मिष्ठान भंडार की व्यावसायिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाना हमारा उद्देश्य न कभी था और न है।

लेकिन, उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा से जुड़े सवालों पर सार्वजनिक बहस चलाना और आम नागरिकों को जागरूक करना मीडिया का दायित्व है। गौतम स्विट्स (टिपटॉप) द्वारा प्रस्तुत खंडन को हम सम्मानपूर्वक स्थान देते हैं। इसके साथ ही, उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण, पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया और गुणवत्तापूर्ण खाद्य वस्तुओं की पहुंच सुनिश्चित करने में जिम्मेदार पत्रकारिता की भूमिका निरंतर जारी रहेगी।

गौतम स्विट्स के कानूनी सलाहकार द्वारा भेजे गए खंडन पत्र का पूर्ण पाठ:

पृष्ठ १

तिथि : २०८३.०७.१३

श्री संपादक जी, नेपाल आज, नया बानेश्वर, काठमांडू।

विषय :- खंडन के संबंध में।

उपरोक्त संबंध में दिनांक २०८३.०७.०४ को दोपहर ३ बजे आपके नेपाल आज नामक ऑनलाइन ने "काठमांडू में चर्चित रेस्टोरेंट और ऑनलाइन फूड डिलीवरी सेवा में बासी तथा अखाद्य वस्तुएं मिलने के बाद उपभोक्ता अधिकारों और खाद्य सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं।" शीर्षक रखकर विभिन्न भ्रामक, तथ्यहीन एवं मनगढ़ंत समाचार प्रकाशित और प्रसारित किए हैं, जिससे इस गलत एवं झूठे समाचार के कारण हमारे व्यवसाय पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। ऑर्डर करने वाले व्यक्ति का बदला हुआ नाम बताकर डेल्टा, अल्फा जैसे नामों का उल्लेख करते हुए सुल्तान बिरयानी से चिकन बिरयानी मंगाने पर बासी, बदबूदार सामान आने, संगम स्विट्स में बासी सामान मिलने जैसे तथ्यों का उल्लेख करते हुए अंत में कुछ दशक पहले टिपटॉप समोसे के भीतर चूहा मिला था कहकर उक्त समाचार के मुख्य पृष्ठ पर हमारे टिपटॉप समोसे के लोगो सहित समोसे की तस्वीर प्रकाशित कर उसके कुछ अंशों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर टिकटॉक, फेसबुक और यूट्यूब सहित सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। यदि किसी फर्म या कंपनी के किसी सामान में अखाद्य सामग्री पाई जाए या अस्वस्थ, बासी सामान मिले तो प्रमाण सहित संबंधित कंपनी की खाद्य सामग्री का प्रकाशन/प्रसारण किया जाना चाहिए; इसके बजाय समाचार के अग्रभाग में हमारे टिपटॉप समोसे और उसके लोगो की तस्वीर रखकर प्रकाशन और प्रसारण किया जाना प्रचलित कानून का गंभीर उल्लंघन है। गौतम स्विट्स का टिपटॉप उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर असर डालने वाले किसी भी सामान का उत्पादन और बिक्री-वितरण नहीं करता है। यह सदियों से साफ, स्वस्थ, ताजा खाद्य सामग्रियां ही स्वयं उत्पादित कर बिक्री-वितरण करता आ रहा है। यदि आपके रिपोर्टर ने सही रिपोर्टिंग की थी और उसी के आधार पर समाचार प्रसारित किया गया था, तो डेल्टा, अल्फा जैसे नाम रखने की नौबत क्यों आई? जिस नाम के व्यक्ति द्वारा ऑर्डर किया गया था उसी का नाम उल्लेख क्यों नहीं किया गया? किसी दूसरी फर्म या कंपनी का सामान बासी, अस्वस्थ मिलने की बात कहकर हमारी 

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टिपटॉप के लोगो की तस्वीर के साथ समाचार के अग्रभाग में क्यों प्रकाशित किया गया? आपके द्वारा प्रसारित उक्त समाचार से हमारी टिपटॉप को रु. ५०,००,०००।– के बराबर व्यापारिक नुकसान हुआ है, क्या आप इसका मुआवजा देने को तैयार हैं? क्या आपका यह कार्य पत्रकार आचार संहिता के विपरीत समाज में भ्रम फैलाकर अपने क्षणिक लाभ के लिए किसी अन्य निर्दोष व्यक्ति को हानि-नुकसान पहुँचाने की नीयत से नहीं किया गया है? इस प्रकार लंबे समय से ग्राहक वर्ग की सेवा में अनवरत समर्पित रहकर समाज में स्थापित होकर ताजा, साफ और स्वस्थ खाद्य सामग्रियां बिक्री-वितरण कर रही व्यावसायिक फर्म गौतम स्विट्स के टिपटॉप के व्यापार-व्यवसाय को धराशायी करने, व्यापार में आँच लाने, समाज में स्थापित प्रतिष्ठा गिराने की दुर्भावना से प्रेस काउंसिल अधिनियम २०४८, प्रेस काउंसिल नियमावली २०४९ और पत्रकार आचार संहिता शिकायत एवं कार्रवाई संबंधी कार्यविधि २०७५ सहित के कानूनी प्रावधानों के विपरीत बिना किसी आधार, कारण और प्रमाण के गलत एवं झूठा समाचार सम्प्रेषित कर हमारे व्यवसाय पर गंभीर असर पहुँचाने का कार्य आपके नेपाल आज ऑनलाइन ने किया है, इसलिए मैं इस खंडन सहित यह आवेदन प्रस्तुत कर रहा हूँ। उचित जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने तथा उसकी सूचना देने की मांग करता हूँ। संलग्न दस्तावेज:

 दिनांक २०८३.०७.०४ को उक्त ऑनलाइन द्वारा प्रकाशित समाचार की प्रति।

प्रतिलिपि: नेपाल प्रेस काउंसिल, सिनामंगल, काठमांडू। गौतम स्विट्स (टिपटॉप) की ओर से अधिकृत: दीपक राई