चीन की राजधानी बीजिंग में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की शीर्ष निर्णय लेने वाली संस्था पोलिटब्यूरो में महिलाओं और जातीय अल्पसंख्यक समुदायों का प्रतिनिधित्व शून्य होने के बाद राजनीतिक समावेशिता और सत्ता संरचना पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में पार्टी की सर्वोच्च शक्ति कुछ ही हाथों में केंद्रित होती जा रही है।

द इरावदी में प्रकाशित विश्लेषक चंदू दोड्डी के अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2022 में चुनी गई 24 सदस्यीय पोलिटब्यूरो में सभी सदस्य बहुसंख्यक हान समुदाय के पुरुष ही थे। इसके साथ ही पिछले 25 वर्षों में पहली बार पोलिटब्यूरो में कोई महिला सदस्य शामिल नहीं हुई, जबकि चीन द्वारा आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त 55 अल्पसंख्यक समुदायों में से किसी को भी स्थान नहीं मिला। हाल के समय में शीर्ष नेताओं के निष्कासन के बाद पोलिटब्यूरो के सक्रिय सदस्यों की संख्या घटकर 21 रह गई है।

पार्टी के निचले स्तरों पर महिलाओं और अल्पसंख्यकों की उपस्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर दर्ज की गई है। वर्ष 2025 के अंत तक पार्टी के लगभग 10.13 करोड़ सदस्यों में महिलाओं की हिस्सेदारी 31.5 प्रतिशत और जातीय अल्पसंख्यकों की 7.8 प्रतिशत थी। हालांकि, 205 सदस्यीय केंद्रीय समिति के पूर्ण सदस्यों में केवल 11 महिलाएं और नौ अल्पसंख्यक नेता ही जगह बना पाए।

गुइझोऊ प्रांत की पूर्व गवर्नर और बाई अल्पसंख्यक समुदाय की वरिष्ठ नेता शेन यिछिन जैसी प्रमुख हस्तियां वर्ष 2023 में स्टेट काउंसिलर बनने के बावजूद पोलिटब्यूरो में प्रवेश हासिल नहीं कर सकीं। अध्ययन में उल्लेख किया गया है कि महिला अधिकारियों को अक्सर महिला महासंघ और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों तक सीमित रखा जाता है, जबकि वित्त, राष्ट्रीय सुरक्षा और संगठन जैसे प्रभावशाली विभाग मुख्य रूप से पुरुष नेताओं को ही सौंपे जाते हैं।

इसी तरह, स्वायत्त क्षेत्रों में सरकार प्रमुख का पद अल्पसंख्यक नेताओं को देने का कानूनी प्रावधान होने के बावजूद, वास्तव में शक्तिशाली माने जाने वाले पार्टी सचिव के पद पर हान समुदाय के अधिकारियों का ही दबदबा बना हुआ है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कार्यकाल में अलग-अलग जातीय पहचान के बजाय एक साझा राष्ट्रीय पहचान और केंद्रीय पार्टी नेतृत्व के प्रति निष्ठा को प्राथमिकता दी जा रही है।

जनसांख्यिकी में गिरावट, रोजगार संकट और शिनजियांग तथा तिब्बत से जुड़ी नीतियों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर निर्णय लेने के लिए नेतृत्व में विविधता को बेहद आवश्यक माना जा रहा है। वर्ष 2027 में प्रस्तावित 21वीं पार्टी कांग्रेस में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या बीजिंग नेतृत्व संरचना में विविधता और समावेशिता बहाल करने के लिए कोई ठोस कदम उठाता है।