नेपाल के अल्पविकसित देश (एलडीसी) की श्रेणी से बाहर निकलने की प्रक्रिया ने घरेलू गारमेंट निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है। नेपाल उद्योग परिसंघ (सीएनआई) के अध्यक्ष वीरेंद्रराज पांडे ने आगाह किया है कि विनिर्माण क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान 5 प्रतिशत से भी नीचे गिर गया है, जो औद्योगिक क्षेत्र की नाजुक स्थिति को दर्शाता है। नेपाल रेडीमेड गारमेंट उद्योग संघ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्पादन क्षेत्र में केवल 7 प्रतिशत रोजगार की हिस्सेदारी औपचारिक रोजगार सृजन में विफलता का संकेत है।

व्यापारिक प्रतिस्पर्धा के मामले में नेपाल अपने पड़ोसियों से काफी पिछड़ रहा है। जहां वियतनाम और भारत में लॉजिस्टिक लागत क्रमशः 10 और 14 प्रतिशत के आसपास है, वहीं नेपाल में यह लागत वस्तु के मूल्य का 30 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। अध्यक्ष पांडे के अनुसार, यूरोपीय संघ (ईयू) को होने वाले नेपाल के कुल निर्यात का 75 प्रतिशत हिस्सा टेक्सटाइल का है। यदि भारत और ईयू के बीच मुक्त व्यापार समझौता संपन्न हो जाता है, तो नेपाली गारमेंट अपनी बाजार हिस्सेदारी खो सकते हैं। साथ ही, भारत और अमेरिका के बीच बदलते व्यापारिक समीकरण भी नेपाली निर्यात को प्रभावित करेंगे।

क्षेत्रीय चुनौतियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि बांग्लादेश ने अपनी तैयारी अधूरी होने के कारण ग्रेजुएशन को तीन साल के लिए टालने का अनुरोध किया है। ऐसी स्थिति में यदि नेपाल अकेले इस सूची से बाहर होता है, तो वह अपने तुलनात्मक लाभ खो देगा। हालांकि सरकार ने 'स्मूथ ट्रांजिशन स्ट्रेटजी' तैयार की है, लेकिन जमीनी स्तर पर उत्पादकता बढ़ाने या लागत कम करने में कोई खास प्रगति नहीं हुई है। भविष्य में इस उद्योग को बचाने के लिए द्विपक्षीय और अधिमान्य व्यापार समझौतों (पीटीए) पर गंभीरता से काम करना अनिवार्य हो गया है।