जेन्जी आंदोलन से जुड़े मामलों में सरकार द्वारा केवल सीमित प्रकरण वापस लेने की सुगबुगाहट के बीच पीड़ितों के परिवारों और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने पोखरा में एक मंच पर आकर न्याय की जोरदार मांग की है। 'जेन्जी आंदोलन मुद्दा संबोधन दबाव समूह' द्वारा पोखरा-3 स्थित पोखरा सेंट्रल ओएसिस में आयोजित विचार-विमर्श कार्यक्रम में वक्ताओं ने सरकार से सभी राजनीतिक मामलों को तुरंत खारिज करने की अपील की।
पिछले एक वर्ष से राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उठा रही प्रमुख युवा कार्यकर्ता सरिश्मा थापा और मोनिका निरौला ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध में शामिल होने के आधार पर जेलों में बंद युवाओं की बिना शर्त रिहाई ही न्याय की पहली शर्त है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार अपने वादों पर खरी नहीं उतरती, तब तक जनसंवाद और सार्वजनिक दबाव का दायरा बढ़ाया जाता रहेगा।
संवाद के दौरान जेल में बंद युवाओं के परिजनों ने अपनी चिंताएं और मुश्किलें मीडिया के समक्ष रखीं और संबंधित अधिकारियों से मानवीय रुख अपनाने का आग्रह किया। दबाव समूह के अध्यक्ष खली थापा, उपाध्यक्ष विवेक नाल्मी, सह-सचिव शांति साई और नागरिक कार्यकर्ता चंद्र बहादुर गुरुंग ने दोहराया कि आंदोलन के दौरान तय हुए 10 सूत्रीय समझौते को पूरी तरह लागू कराने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
कार्यक्रम के समापन पर दबाव समूह के सचिव राजन श्रेष्ठ ने तथ्यपरक रिपोर्टिंग के जरिए इस संवेदनशील मुद्दे को उजागर करने के लिए पत्रकारों का आभार जताया। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि जब तक सभी बंदियों की रिहाई और समझौते का पूर्ण पालन नहीं हो जाता, तब तक उनका यह खबरदारी अभियान जारी रहेगा।