प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भूमि संबंधी समस्याओं के समाधान को सरकार की प्रमुख प्राथमिकता बताते हुए 1,000 दिनों के भीतर भूमिहीन सुकुम्बासी समस्या का स्थायी समाधान करने की घोषणा की है। सरकार की आगामी कार्यदिशा को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री शाह ने जानकारी दी कि अब तक विभिन्न जिलों में 5,737 परिवारों को भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र (लालपूर्जा) वितरित किए जा चुके हैं, जिनमें स्ववासी, भूमिहीन दलित, भूमिहीन सुकुम्बासी और अव्यवस्थित निवासी शामिल हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि वि.सं. 2015 के संसदीय चुनाव में नेपाली कांग्रेस के घोषणापत्र से शुरू हुआ भूमिहीनों को भूमि देने का वादा सात दशकों के बाद भी अधूरा रहा। देश में पंचायत, बहुदलीय लोकतंत्र और गणतंत्र जैसी प्रणालियाँ बदलीं, लेकिन राजनीतिक नियुक्तियों पर आधारित आयोग और समितियाँ समस्या का समाधान करने में विफल रहीं। वि.सं. 2077 से पिछले वर्ष तक ही ऐसे राजनीतिक ढाँचों पर दो अरब रुपये से अधिक का सरकारी धन खर्च हुआ, लेकिन कोई अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं हुआ।
वर्तमान सरकार ने राजनीतिक बंदरबांट और अनावश्यक प्रशासनिक परतों को समाप्त कर तकनीकी विशेषज्ञता, स्थानीय निकायों के साथ समन्वय और पारदर्शी प्रक्रिया का मार्ग चुना है। भूमि समस्या समाधान समिति के गठन के बाद देशभर से आंकड़े एकीकृत किए गए हैं और वर्तमान में प्रणाली में दर्ज 13,11,197 आवेदनों का अध्ययन और सत्यापन कार्य प्रगति पर है।
नई कार्य योजना के तहत सार्वजनिक महत्व और जोखिम वाले क्षेत्रों में रहने वाले भूमिहीन परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा। काठमांडू घाटी से विस्थापित परिवारों के लिए उनके स्थायी गृह जिलों में ही भूमि प्रबंधन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके अतिरिक्त, फर्जी विवरण देकर खुद को भूमिहीन बताने वालों के खिलाफ अभिलेखों का मिलान कर कानूनी कार्रवाई शुरू की जा चुकी है।
सरकार भूमि अधिनियम और वन अधिनियम सहित संबंधित कानूनों में आवश्यक संशोधन कर नीतिगत और प्रक्रियात्मक बाधाओं को दूर कर रही है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) सरकार ने 1,000 दिनों में भूमिहीनता समाप्त करने को एक प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (KPI) के रूप में निर्धारित किया है, जिससे नेपाल के जिलों को चरणबद्ध तरीके से भूमिहीन-मुक्त घोषित किया जा सके।