काठमांडू | अंतरराष्ट्रीय डेस्क - भारत ने इंडोनेशिया के साथ डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर) तथा डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग का विस्तार करने की पहल को तेज कर दिया है। अंतर्राष्ट्रीय विश्लेषण के अनुसार, डिजिटल भुगतान प्रणाली, ई-गवर्नेंस, डिजिटल पहचान और प्रौद्योगिकी-आधारित सार्वजनिक सेवाओं के अपने अनुभव साझा करते हुए भारत ने इंडोनेशिया के डिजिटल रूपांतरण में एक महत्वपूर्ण भागीदार की भूमिका निभाना शुरू कर दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत द्वारा हाल के वर्षों में विकसित किया गया डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा दुनिया के सबसे सफल मॉडलों में से एक के रूप में स्थापित हुआ है। विश्लेषण में कहा गया है कि डिजिटल भुगतान प्रणाली (यूपीआई), डिजिटल पहचान, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण ने भारत को दुनिया के कई देशों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बना दिया है।
इंडोनेशिया के साथ इस सहयोग से डिजिटल अर्थव्यवस्था, फिनटेक, साइबर सुरक्षा और सार्वजनिक सेवा वितरण में नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत का अनुभव इंडोनेशिया को डिजिटल वित्तीय पहुंच बढ़ाने, सरकारी सेवाओं के आधुनिकीकरण और प्रौद्योगिकी-आधारित आर्थिक विकास को गति देने में मदद करेगा।
भारत सरकार डिजिटल नवाचार को अपनी आर्थिक विकास रणनीति का एक प्रमुख आधार बनाते हुए दुनिया के विभिन्न देशों के साथ प्रौद्योगिकी साझेदारी का विस्तार कर रही है। एशिया, अफ्रीका और यूरोप के विभिन्न देश भारतीय डिजिटल मॉडल में बढ़ती रुचि दिखा रहे हैं, जिसने भारत के अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव को और मजबूत किया है।
अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, भारत-इंडोनेशिया डिजिटल सहयोग केवल प्रौद्योगिकी तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापार, निवेश, स्टार्टअप, शिक्षा और क्षमता विकास के क्षेत्रों में भी नई संभावनाएं खोलेगा। इससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और गहरी होने की उम्मीद है।
विश्लेषकों ने भारत की डिजिटल कूटनीति को 21वीं सदी के एक प्रभावी 'सॉफ्ट पावर' के रूप में व्याख्यायित किया है। इंडोनेशिया के साथ इस सहयोग को भारत द्वारा अपने डिजिटल नवाचार को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।