काठमांडू | अंतर्राष्ट्रीय डेस्क - हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियाँ लगातार जटिल होती जा रही हैं, ऐसे में यह विश्लेषण सामने आया है कि भारत औपचारिक सैन्य गठबंधनों के बजाय व्यावहारिक रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता देते हुए अपनी क्षेत्रीय भूमिका का विस्तार कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यही रणनीति भारत को स्वतंत्र विदेश नीति के साथ क्षेत्रीय स्थिरता में एक प्रभावशाली शक्ति बना रही है।

विश्लेषण के अनुसार, भारत अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, इंडोनेशिया और अन्य समान विचारधारा वाले देशों के साथ समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, प्रौद्योगिकी, खुफिया जानकारी साझा करने तथा आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ीकरण में सहयोग का विस्तार कर रहा है। हालाँकि, यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत किसी औपचारिक सैन्य गठबंधन में शामिल हुए बिना अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को लगातार प्राथमिकता दे रहा है।

सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की इस लचीली रणनीति ने बदलते भू-राजनीतिक माहौल में विभिन्न साझेदार राष्ट्रों के साथ आवश्यकतानुसार सहयोग करना आसान बना दिया है। क्वाड (Quad), हिंद-प्रशांत समुद्री अभ्यास, द्विपक्षीय रक्षा समझौतों और बहुपक्षीय सुरक्षा संवादों में भारत की सक्रिय भागीदारी को इस रणनीतिक दृष्टिकोण के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला का संरक्षण और नियमों पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देना वर्तमान में प्रमुख प्राथमिकताएँ बन गए हैं। भारत इन विषयों को अपनी विदेश और सुरक्षा नीति के केंद्र में रखते हुए दुनिया के प्रमुख लोकतांत्रिक देशों के साथ संबंधों को लगातार मजबूत कर रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के जानकारों के अनुसार, भारत की विदेश नीति अब केवल दक्षिण एशिया तक सीमित न रहकर हिंद-प्रशांत के व्यापक रणनीतिक संतुलन को प्रभावित करने की दिशा में विकसित हो रही है। क्षेत्रीय साझेदारी, आर्थिक सहयोग और रक्षा कूटनीति को समान रूप से आगे बढ़ाने की भारत की नीति ने वैश्विक समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, औपचारिक सैन्य गठबंधन के बजाय साझा हितों पर आधारित लचीले सहयोग का भारतीय मॉडल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बदलती अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों में भारत की यह व्यावहारिक कूटनीतिक रणनीति आने वाले वर्षों में देश के क्षेत्रीय प्रभाव और वैश्विक रणनीतिक महत्व को और मजबूत करेगी।