पाकिस्तान के बलोचिस्तान में न्यायिक स्वतंत्रता समाप्त होने का दावा करते हुए जेल में बंद बलोच राजनीतिक नेता डॉ. महरंग बलोच ने अदालत प्रणाली पर जनता का विश्वास पूरी तरह टूटने का गंभीर आरोप लगाया है।

'द बलोचिस्तान पोस्ट' द्वारा १२ सितम्बर को प्रसारित जेल बयान के अनुसार, बलोच यूनिटी कमेटी (बीवाईसी) की प्रमुख ने दावा किया कि मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश मोहम्मद अली मुबीन और कादिर शाह बुखारी ने खुद स्वीकार किया है कि उन पर बलोच नेताओं को सजा सुनाने के लिए भारी दबाव बनाया जा रहा है।

महरंग बलोच के अनुसार, ७ सितम्बर को वकीलों की हड़ताल और बचाव पक्ष के अनुपस्थित रहने के बावजूद गुलजादी बलोच के मामले में गवाहों से पूछताछ की गई। इसके अलावा, अभियुक्तों की अनुमति के बिना सरकारी वकीलों को विशेष अधिकार देकर इस्लामाबाद ले जाया गया, जबकि निष्पक्ष सुनवाई के मौलिक अधिकारों का हनन किया गया।

उन्होंने मुख्य न्यायाधीश कामरान मलाखिल पर पिछले ६ महीनों से जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करने के बजाय उन्हें बार-बार सूची से हटाने का आरोप लगाया। इस तरह की 'फेसलेस ट्रायल' के विरोध में बीवाईसी ने १३ जून से २० मामलों की अदालती कार्यवाही का बहिष्कार किया हुआ है।

आजीवन कारावास की सजा का सामना कर रही डॉ. महरंग की अपील पर आगामी अक्टूबर में सुनवाई होनी है। उन्होंने पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है।