नेपाल के ललितपुर में स्थित ऐतिहासिक बौद्ध मठ 'ज्येष्ठ वर्ण महाविहार' को उसके अनुकरणीय जीर्णोद्धार कार्य के लिए प्रतिष्ठित २०२५ यूनेस्को एशिया-प्रशांत सांस्कृतिक विरासत संरक्षण पुरस्कार के तहत 'अवार्ड ऑफ मेरिट' से नवाजा गया है। शुक्रवार को आयोजित एक विशेष समारोह में नेपाल के लिए यूनेस्को के प्रतिनिधि याको दु तोई ने ललितपुर महानगरपालिका के मेयर चिरीबाबु महर्जन और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के उप-प्रमुख डॉ. राकेश पांडे की गरिमामयी उपस्थिति में यह पुरस्कार महाविहार उपभोक्ता समिति को सौंपा। इस अवसर पर स्थानीय समुदाय के सदस्य, विरासत संरक्षणवादी और नेपाल सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

वर्ष २०१५ के विनाशकारी गोरखा भूकंप के बाद भारत सरकार द्वारा घोषित पुनर्निर्माण अनुदान के हिस्से के रूप में इस महाविहार का संरक्षण कार्य १३.७८ करोड़ नेपाली रुपये की लागत से पूरा किया गया। इस ऐतिहासिक परियोजना के लिए भारत सरकार ने तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करने के लिए 'इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज' (इन्टैक) को परियोजना प्रबंधन सलाहकार नियुक्त किया था। इन्टैक ने नेपाल सरकार की केंद्रीय परियोजना कार्यान्वयन इकाई (सीएलपीआईयू) और स्थानीय समुदाय के साथ मिलकर काम किया। इस पुनर्निर्मित परिसर का उद्घाटन मार्च २०२४ में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव और नेपाल के तत्कालीन शहरी विकास मंत्री धन बहादुर बुढा द्वारा किया गया था।

यूनेस्को ने इस परियोजना को विशेष रूप से इसके समुदाय-केंद्रित दृष्टिकोण के लिए सराहा है, जिसने जटिल ऐतिहासिक नेवारी काष्ठकला (लकड़ी की नक्काशी) और पारंपरिक वास्तुकला को संरक्षित करते हुए आधुनिक भूकंपीय सुरक्षा को सफलतापूर्वक शामिल किया। इस पूरी संरक्षण प्रक्रिया की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि निर्माण कार्य के दौरान भी नेवार बौद्ध समुदाय की जीवन्त विरासत, दैनिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक गतिविधियां बिना किसी बाधा के निरंतर चलती रहीं।

समारोह को संबोधित करते हुए भारतीय दूतावास के उप-प्रमुख डॉ. राकेश पांडे ने सभी हितधारकों को बधाई दी और कहा कि ज्येष्ठ वर्ण महाविहार परियोजना की सफलता भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाती है। उन्होंने साझा और समृद्ध सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण में नेपाल का सहयोग करने की भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दोहराया।

ललितपुर के मेयर चिरीबाबु महर्जन ने ललितपुर की सांस्कृतिक विरासतों के जीर्णोद्धार के लिए भारत सरकार द्वारा प्रदान की जा रही आर्थिक सहायता के प्रति आभार व्यक्त किया। वहीं, महाविहार समिति के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह पुनर्निर्मित महाविहार स्थानीय समुदाय की जीवटता और दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ द्विपक्षीय मित्रता के एक गौरवशाली प्रतीक के रूप में हमेशा खड़ा रहेगा।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने भूकंप के बाद नेपाल के पुनर्निर्माण के लिए १ अरब अमेरिकी डॉलर की सहायता का संकल्प लिया था। इसके तहत नेपाल के ८ जिलों में ३० सांस्कृतिक विरासत परियोजनाओं (जैसे काठमांडू का सेतो मच्छिन्द्रनाथ मंदिर, भक्तपुर का जंगम मठ और सिंधुपालचोक का तार्के घ्यांग गुम्बा) का कायाकल्प किया जा रहा है। भारत अब तक ५०,००० निजी आवास, ७० स्कूल, १२२ स्वास्थ्य संस्थान और १७ सांस्कृतिक विरासत स्थलों का पुनर्निर्माण पूरा कर नेपाल को सौंप चुका है, जो नेपाल के समग्र सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक पुनरुत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।