पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ द्वारा पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में जारी आंदोलन को "देशद्रोह की शुरुआत" बताए जाने के बाद क्षेत्र में राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है।

ज्वाइन्ट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन में क्षेत्रीय स्वायत्तता, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और चुनावी व्यवस्था में सुधार की मांग की जा रही है। हालांकि, सरकार इस आंदोलन को राज्य विरोधी गतिविधि के रूप में देखती नजर आ रही है।

एक सार्वजनिक कार्यक्रम में आसिफ ने कहा कि आंदोलन की कुछ गतिविधियां राज्य की सत्ता और कानूनी व्यवस्था को चुनौती दे रही हैं। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों से कानून लागू करने में सख्ती बरतने का आग्रह किया और कहा कि सरकार किसी भी प्रकार की अराजकता को स्वीकार नहीं करेगी।

रक्षा मंत्री के बयान के बाद आंदोलनकारी संगठनों ने सरकार पर राजनीतिक असहमति को अपराध की तरह पेश करने का आरोप लगाया है। जेएएसी समर्थकों का कहना है कि उनका आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकारों, स्थानीय स्वशासन और उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा हुआ है।

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पिछले कुछ सप्ताह से पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के कई शहरों में प्रदर्शन और बंद जारी हैं। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें भी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हिंसा से जुड़ी घटनाओं में एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस आंदोलन को केवल सुरक्षा चुनौती के रूप में देखने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा और इसके लिए संवाद तथा राजनीतिक प्रक्रिया की आवश्यकता है।

क्षेत्रीय चुनावों की तैयारियों के बीच सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बढ़ती दूरी ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजनीति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।