नेपाल के कोशी प्रदेश में सत्तारूढ़ सीपीएन-यूएमएल के भीतर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। पार्टी अध्यक्ष केपी शर्मा ओली गुट द्वारा पद छोड़ने के निर्देश को मुख्यमंत्री हिक्मत कुमार कार्की ने मानने से इनकार कर दिया है।

नेतृत्व बदलने की कवायद पार्टी अध्यक्ष ओली और सीपीएम अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल 'प्रचंड' के बीच हुए तीन सूत्री समझौते के तहत ओली पक्ष कार्की की जगह तिलकुमार मेन्याङ्बो को मुख्यमंत्री बनाना चाहता है। पार्टी सचिव और प्रांतीय प्रभारी शेरधन राय ने कार्की से मुलाकात कर इस्तीफा देने को कहा है और प्रांतीय सांसदों के साथ लामबंदी शुरू कर दी है।

संस्थागत फैसले की मांग संविधान की धारा 168 (5) के तहत नियुक्त कार्की को पार्टी महासचिव शंकर पोखरेल का समर्थन हासिल है। कार्की ने स्पष्ट किया है कि वे केवल मौखिक निर्देशों पर पद त्याग नहीं करेंगे और इसके लिए पार्टी के आधिकारिक संस्थागत फैसले की आवश्यकता होगी।

संसदीय दल का गणित 93 सदस्यीय प्रांतीय विधानसभा में यूएमएल के 40 विधायक हैं। उपसभामुख को छोड़कर 39 सदस्य मतदान के योग्य हैं। संसदीय दल के नेता को पद से हटाने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। संस्थापन पक्ष का दावा है कि उसके पास 26 से अधिक विधायक हैं, जबकि कार्की गुट अपने समर्थन को बचाए रखने की कोशिश में जुटा है।

अविश्वास प्रस्ताव पर रणनीति संसदीय दल के नेता पद से हटाए जाने के बावजूद मुख्यमंत्री पद अपने आप खाली नहीं होता। इसे देखते हुए संस्थापन पक्ष अब गठबंधन सहयोगियों के साथ मिलकर कार्की के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के विकल्पों पर चर्चा कर रहा है। हालांकि, विपक्षी और सहयोगी दलों ने यूएमएल को यह विवाद संसद में लाने के बजाय अंदरूनी रूप से सुलझाने की सलाह दी है।