नेपाल में तिहार (यमपंचक) पर्व के अवसर पर मनाई जाने वाली लक्ष्मी पूजा के लिए वर्ष 2026 के शुभ मुहूर्त, पारंपरिक रीति-रिवाजों और विस्तृत पूजा विधि की जानकारी सामने आई है।
वर्ष 2026 के लिए शुभ मुहूर्त
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लक्ष्मी पूजा के लिए सही समय का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है:
-
प्रदोष काल (गृहस्थ पूजा के लिए उत्तम समय): शाम 5.31 बजे से रात 8.09 बजे तक
-
वृषभ काल (स्थिर शुक्र ऊर्जा): शाम 5.54 बजे से रात 7.50 बजे तक
-
महानिशीथ काल (रात्रि साधना): रात 11.57 बजे से मध्यरात्रि 12.48 बजे तक
-
अभिजित मुहूर्त (कार्यालय एवं व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए): सुबह 11.45 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक
नेपाल में तिहार की परंपराएं
नेपाल में लक्ष्मी पूजा का पर्व तिहार (यमपंचक) के दौरान विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर घरों और व्यावसायिक स्थलों को साफ-सुथरा कर मुख्य द्वार पर गेंदे के फूलों की मालाएं, रंग-बिरंगी रंगोली या मंडला बनाए जाते हैं। माता लक्ष्मी के आगमन के स्वागत में मिट्टी के दीयों और मोमबत्तियों की पंक्तियां सजाई जाती हैं।
पूजा के समय श्रद्धालु रात्रि में एकत्रित होकर देवी लक्ष्मी को पुष्प, फल, सेल रोटी, मिठाई और सिक्के अर्पित करते हैं। वहीं, व्यापारी वर्ग अपने बही-खातों और वित्तीय दस्तावेजों का पूजन कर समृद्धि की कामना करते हैं। पूजा संपन्न होने के पश्चात बच्चों और युवाओं की टोलियां घर-घर जाकर पारंपरिक भैलो गीत गाती हैं और वातावरण को उत्सवमय बनाती हैं।
सरल पूजा विधि
लक्ष्मी पूजन की प्रक्रिया को निम्नलिखित छह चरणों में संपन्न किया जाता है:
-
तैयारी: पूजा स्थल को स्वच्छ कर वेदी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं। इसके पश्चात देवी लक्ष्मी, भगवान गणेश और देवी सरस्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
-
कलश स्थापना: तांबे या पीतल के कलश में स्वच्छ जल भरें और उसमें एक सिक्का, सुपारी, थोड़े चावल तथा हल्दी डालें। कलश के मुख पर आम या पीपल के पांच पत्ते रखकर ऊपर नारियल स्थापित करें।
-
भगवान गणेश का पूजन: सर्वप्रथम विघ्नहर्ता श्री गणेश का आह्वान करते हुए "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का 3 से 11 बार जाप करें तथा उन्हें पुष्प और मिष्ठान अर्पित करें।
-
देवी लक्ष्मी की पूजा: दीपक और धूप जलाकर लक्ष्मी मंत्र "ॐ श्रीं महालक्ष्मीयै नमः" का 11 बार जाप करते हुए फूल, अक्षत (हल्दी मिश्रित चावल) और मिठाई अर्पित करें।
-
व्यावसायिक एवं शैक्षणिक सामग्री का पूजन: अपनी आजीविका से जुड़ी वस्तुओं जैसे बटुआ, लैपटॉप या पाठ्यपुस्तकों को पूजा स्थल के समीप रखकर आशीर्वाद प्राप्त करें।
-
आरती: कपूर जलाकर लक्ष्मी माता की आरती गाएं और श्रद्धापूर्वक आरती की लौ से आशीर्वाद लें। रात्रि में गृह के मुख्य द्वार को खुला रखें और दीयों को देर रात तक जलने दें।