विनाशकारी प्राकृतिक आपदा के झटके से उबरते हुए नेपाल ने मध्य-सितंबर से मध्य-अक्टूबर के बीच भारत को 3.9 करोड़ अमेरिकी डॉलर (लगभग 5.92 अरब नेपाली रुपये) की बिजली का निर्यात किया है। नेपाल विद्युत प्राधिकरण (एनईए) के अनुसार, अगस्त में आई भीषण बाढ़ से उत्पन्न व्यवधानों को दूर करते हुए सीमा पार बिजली व्यापार फिर से अपनी पुरानी लय में लौट आया है।
नेपाल विद्युत प्राधिकरण के कार्यकारी निदेशक दीर्घायु कुमार श्रेष्ठ ने बताया कि अगस्त की बाढ़ के कारण बिजली निर्यात में आई अस्थायी रुकावट के बाद आपूर्ति तेजी से बहाल हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अवधि के दौरान भारत को भेजी गई कुल बिजली का लगभग दो-तिहाई हिस्सा द्विपक्षीय समझौतों के तहत निर्यात किया गया था।
उल्लेखनीय है कि 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास उच्च हिमालयी क्षेत्र में हुए हिम-स्खलन के कारण आई अचानक बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल में भारी तबाही मचाई थी। इस प्राकृतिक आपदा में लगभग 1,400 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5,000 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। बाढ़ के कारण सड़कों, पुलों, मकानों और कई जलविद्युत परियोजनाओं को व्यापक नुकसान पहुंचा था।
इसी क्रम में नेपाल ने 23 अक्टूबर को भारतीय ट्रांसमिशन नेटवर्क के माध्यम से बांग्लादेश को 40 मेगावाट बिजली का निर्यात भी पुनः शुरू कर दिया है। भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के कारण त्रिशूली और चिलिमी जलविद्युत संयंत्र क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिसके चलते बांग्लादेश को होने वाली बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से ठप हो गई थी।
दूसरी ओर, आपदा राहत और पुनर्निर्माण के लिए संयुक्त राष्ट्र जलवायु क्षति कोष ने नेपाल को 2 करोड़ डॉलर की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है, जो नेपाल को मिलने वाला पहला 'लॉस एंड डैमेज' भुगतान है। क्षतिग्रस्त जलविद्युत परियोजनाओं की मरम्मत के साथ ही नेपाल क्षेत्रीय ऊर्जा व्यापार को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।