नेपाल में पाई जाने वाली मूल्यवान जड़ी-बूटियों को वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से व्यावसायिक दवा उत्पादन में बदलकर देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सकता है। वन और पर्यावरण मंत्री गीता चौधरी ने इस बात पर जोर दिया है कि देश की प्राकृतिक संपदा को केवल शुरुआती शोध तक ही सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे सीधे रोजगार और औद्योगिक विकास से जोड़ा जाना चाहिए।
रविवार को वनस्पति विभाग के 66वें स्थापना दिवस और 27वें वनस्पति दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने यह बात कही। उन्होंने विभाग को स्पष्ट निर्देश दिया कि वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों के साथ मिलकर स्थानीय जड़ी-बूटियों को कम से कम 'प्री-क्लिनिकल ट्रायल' (पूर्व-नैदानिक परीक्षण) के स्तर तक ले जाने की दिशा में तुरंत काम शुरू करे।
मंत्री चौधरी के अनुसार, सरकारी शोधकर्ताओं द्वारा विकसित किए गए फॉर्मूले को निजी क्षेत्र के साथ रणनीतिक साझेदारी के जरिए व्यावसायिक रूप दिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इस ठोस कदम से घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा, ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और विदेशी मुद्रा अर्जित करने का एक नया मार्ग प्रशस्त होगा।
इस परिवर्तन को सुविधाजनक बनाने के लिए, सरकार मौजूदा नीतियों और कानूनी ढांचे में बड़े सुधार करने की तैयारी कर रही है। चौधरी ने आश्वासन दिया कि ये सुधार वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करेंगे, उत्कृष्ट कार्य करने वाले वैज्ञानिकों को पुरस्कृत करेंगे और निजी निवेशकों के लिए एक अनुकूल वातावरण तैयार करेंगे। इसके अलावा, उन्होंने युवाओं को वनस्पति विज्ञान और जैविक अनुसंधान की ओर अधिक संख्या में आकर्षित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
इसी कार्यक्रम में यह भी घोषणा की गई कि वनस्पति विभाग नेपाल की प्राकृतिक संपदा का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण कर रहा है और जल्द ही 'व्यापक नेपाल फ्लोरा' (Comprehensive Flora of Nepal) प्रकाशित करने की तैयारी में है। अब तक 658 देशी पौधों की प्रजातियों का दस्तावेजीकरण सफलतापूर्वक किया जा चुका है।
यदि सरकार की नई नीतियां और वैज्ञानिक अनुसंधान एक साथ मिलकर प्रभावी ढंग से काम करते हैं, तो नेपाल जल्द ही वैश्विक हर्बल और फार्मास्युटिकल बाजार में अपनी एक मजबूत और स्वतंत्र पहचान स्थापित कर सकता है।