नेपाल के प्रशासनिक ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। राष्ट्रपति रामचन्द्र पौडेल ने मंत्रिपरिषद की सिफारिश पर 'सार्वजनिक पदाधिकारियों की पदमुक्ति से संबंधित विशेष व्यवस्था अध्यादेश, 2083' को मंजूरी दे दी है। इस कानूनी आदेश के लागू होते ही देश के विभिन्न विभागों और संस्थानों में कार्यरत 1,594 राजनीतिक और प्रशासनिक पदाधिकारी एक साथ अपने पदों से मुक्त हो गए हैं।
शाह सरकार ने इस बड़े कदम को प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण और राज्य के निकायों में नई ऊर्जा फूंकने की एक कोशिश करार दिया है। इस अध्यादेश के प्रभाव से संचार, नागरिक उड्डयन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारी संख्या में पद रिक्त हो गए हैं।
संचार और उड्डयन क्षेत्र में नेपाल एयरलाइंस कॉर्पोरेशन, राष्ट्रीय समाचार समिति (RSS), गोरखापत्र संस्थान और प्रेस काउंसिल जैसे संस्थानों के अध्यक्षों और निदेशकों की छुट्टी हो गई है। नेपाल दूरसंचार प्राधिकरण और नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (CAAN) के शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारी भी अब पदमुक्त कर दिए गए हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में इसका असर सबसे व्यापक है। त्रिभुवन विश्वविद्यालय के 84 पदाधिकारियों सहित काठमांडू विश्वविद्यालय, पोखरा विश्वविद्यालय और लुम्बिनी बौद्ध विश्वविद्यालय जैसे प्रमुख संस्थानों के कुलपति और रजिस्ट्रार अब अपने पदों पर नहीं रहे। शिक्षक सेवा आयोग और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग में भी अब पूर्ण नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति बन गई है।
स्वास्थ्य सेवा और बुनियादी ढांचा क्षेत्र भी इस बदलाव की चपेट में है। नेपाल मेडिकल काउंसिल, नेपाल नर्सिंग काउंसिल और बीपी कोइराला स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान जैसे संस्थानों के प्रबंधन को हटा दिया गया है। ऊर्जा क्षेत्र में नेपाल विद्युत प्राधिकरण और काठमांडू घाटी विकास प्राधिकरण जैसे महत्वपूर्ण निकायों के बोर्ड को भंग कर दिया गया है।
सरकार ने अब इन रिक्त पड़े 1,594 पदों पर नई नियुक्ति प्रक्रिया को जल्द ही शुरू करने का संकेत दिया है। राज्य के विभिन्न तंत्रों में एक साथ इतने बड़े पैमाने पर हुई पदमुक्ति ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, जिसके आने वाले समय में दूरगामी परिणाम होंगे।