नेपाल के पेयजल मंत्रालय ने घोषणा की है कि भविष्य की सभी पेयजल और स्वच्छता परियोजनाओं में महिलाओं की सहभागिता और सुविधा को प्राथमिकता दी जाएगी। विश्व जल दिवस के अवसर पर ललितपुर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्रालय की प्रवक्ता मीना श्रेष्ठ ने स्पष्ट किया कि सरकार अब उन परियोजनाओं को बंद कर रही है जो बिना किसी ठोस आधार के शुरू की जाती थीं। अब केवल उन्हीं योजनाओं को मंजूरी दी जाएगी जो स्थानीय जरूरतों पर आधारित होंगी।

लैंगिक रूप से संवेदनशील पेयजल प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने देश के सभी ७५३ स्थानीय निकायों में 'राष्ट्रीय पेयजल स्वच्छता और स्वच्छता प्रबंधन प्रणाली' लागू की है। इस प्रणाली के माध्यम से लगभग ६०० स्थानीय निकाय डेटा प्रविष्टि का काम कर रहे हैं, जबकि ३०० निकायों ने अपना औपचारिक 'वॉश प्लान' बनाना शुरू कर दिया है। इस डिजिटल डेटाबेस का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या महिलाओं और विकलांग व्यक्तियों तक पेयजल की समान पहुंच सुनिश्चित हो पा रही है या नहीं।

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मंत्रालय ने यह भी अनिवार्य किया है कि भविष्य में बनने वाले सभी सार्वजनिक शौचालय महिला और विकलांगों के अनुकूल होने चाहिए। प्रवक्ता श्रेष्ठ के अनुसार, वर्तमान तीन स्तरीय सरकार के ढांचे में बड़े प्रोजेक्ट केंद्र द्वारा, मध्यम प्रोजेक्ट प्रांत द्वारा और छोटे प्रोजेक्ट स्थानीय निकायों द्वारा डोनर पार्टनर्स के सहयोग से कार्यान्वित किए जा रहे हैं। मंत्रालय का मानना है कि इस नई व्यवस्था और डेटा-आधारित योजना से संसाधनों के दुरुपयोग पर रोक लगेगी और समाज के हर वर्ग को पानी का अधिकार मिल सकेगा।