नेपाल के सुनसरी जिले में भड़की सांप्रदायिक हिंसा ने अब एक गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा चिंता का रूप ले लिया है।
सशस्त्र पुलिस बल के इंस्पेक्टर राकेश राई के नेतृत्व में हुई पुलिस फायरिंग में २१ लोग घायल हुए, जिनमें से दो युवक अभी भी वेंटिलेटर पर हैं और एक का हाथ काटना पड़ा है।
हिंसा और उसके बाद आठ जिलों में हुए प्रदर्शनों के दौरान अब तक चार लोगों की जान जा चुकी है।
नेपाल के गृह मंत्रालय को सौंपी गई राष्ट्रीय अनुसंधान विभाग (एनआईडी) की रिपोर्ट के अनुसार, इस हिंसा के पीछे पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई की भूमिका संदिग्ध है।
जांच में सामने आया है कि तुर्की में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के मौलाना मोहम्मद इलियास घुमान घटना से पांच दिन पहले सुनसरी के एक मस्जिद में ठहरे थे।
घुमान का संबंध हरकत-उल-मुजाहिदीन और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से बताया गया है।
विवाद की शुरुआत मुहर्रम के लिए एक शिव मंदिर की खाली जमीन पर लगाए गए इस्लामी झंडों से हुई, जिन्हें प्रशासन से बार-बार शिकायत के बावजूद नहीं हटाया गया।
२६ जुलाई की रात जब कांवड़ियों का एक समूह जल लेने जा रहा था, तब पास के एक मदरसे से उन पर हमला किया गया।
रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि हमले के वक्त बिजली विभाग के कर्मचारी नसीम अंसारी ने जानबूझकर इलाके की बिजली काट दी थी।
खुफिया जानकारी यह भी बताती है कि घुमान ने काठमांडू की जामा मस्जिद के इमाम के साथ मिलकर भारत की सीमा से सटे नेपाल के संवेदनशील जिलों में कट्टरपंथियों के साथ गुप्त बैठकें कीं।
ठीक उसी समय, २० जुलाई को काठमांडू पहुंचे नौ बांग्लादेशी मौलवी भी इन क्षेत्रों में मौजूद थे।
हिन्दुस्तान समाचार द्वारा दी गई इस रिपोर्ट के आधार पर, खुफिया एजेंसियों ने भविष्य के सुरक्षा खतरों को टालने के लिए इन बैठकों और हिंसा के बीच के संबंधों की सूक्ष्म जांच की सिफारिश की है।