काठमांडू — अफगानिस्तान के पूर्वी क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए हवाई हमले के बाद पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंध और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं। पाकिस्तान ने इस हमले को सीमा क्षेत्र में सक्रिय सशस्त्र समूहों के खिलाफ कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत किया है, जबकि अफगान पक्ष ने अपने क्षेत्र में की गई सैन्य कार्रवाई का विरोध करते हुए नागरिक हताहत होने की बात कही है।

21 सितंबर को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के पक्तिका और कुनार प्रांतों में हवाई हमला किया था। पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई में 28 लड़ाके मारे गए थे। हालांकि, अफगान तालिबान अधिकारियों और संयुक्त राष्ट्र के स्रोतों के अनुसार, हमले में एक पुरुष, एक महिला और एक बच्ची सहित कम से कम तीन नागरिकों की मौत हुई थी।

पाकिस्तान ने अपनी कार्रवाई को हालिया आतंकवादी हमलों की प्रतिक्रिया के रूप में स्पष्ट किया है। विशेष रूप से पाकिस्तान के कोहाट में हुए घातक हमले के बाद, इस्लामाबाद ने दावा किया है कि अफगान क्षेत्र में स्थित सशस्त्र समूहों के ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक थी। एपी के अनुसार, कोहाट की घटना में कम से कम 21 लोगों की मौत हुई थी और 100 से अधिक घायल हुए थे।

लेकिन सुरक्षा चुनौतियों और नागरिक सुरक्षा के बीच की सीमा ही वर्तमान विवाद का मुख्य विषय बन गई है। राजनयिक और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए दूसरे देश के क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई करने से नागरिकों को नुकसान पहुँचने की स्थिति पैदा होना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक गंभीर चुनौती है।

खामा प्रेस के विश्लेषण में पाकिस्तान की हालिया सुरक्षा नीति के मानवीय प्रभाव को अफगान शरणार्थियों, छात्रों, पत्रकारों और आम जनता पर बढ़ते दबाव से जोड़ा गया है। इस विश्लेषण ने सवाल उठाया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर सैन्य कार्रवाई की जाने के बावजूद नागरिकों और सशस्त्र समूहों के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखा जाना चाहिए।

इस वर्ष पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा क्षेत्र में हिंसा और पारस्परिक आरोप-प्रत्यारोप बढ़ते रहे हैं। इस्लामाबाद यह आरोप लगाता रहा है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) सहित अन्य समूह अफगान भूमि से पाकिस्तान में हमले कर रहे हैं। वहीं, काबुल ऐसे आरोपों को खारिज करता रहा है।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इससे पहले भी पाकिस्तानी सैन्य कार्रवाई के कारण अफगान नागरिकों की मौत और घायल होने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय द्वारा मार्च में जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में पाकिस्तानी सैन्य बलों के कारण अफगानिस्तान में 87 नागरिकों की मौत हुई थी और 518 लोग घायल हुए थे।

हालिया घटना ने अफगानिस्तान की संप्रभुता, सीमा सुरक्षा के अधिकार और आतंकवाद विरोधी कार्रवाई के बीच जटिल संबंधों को एक बार फिर सतह पर ला दिया है। यद्यपि पाकिस्तान के लिए अपनी धरती पर सशस्त्र हिंसा को रोकना एक प्रमुख सुरक्षा चुनौती है, लेकिन अफगान क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई से नागरिक क्षति बढ़ने पर द्विपक्षीय तनाव और गहरा होने का जोखिम बना रहता है।

दक्षिण एशिया में पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव का प्रभाव दोनों देशों की सीमाओं से परे भी पड़ सकता है। सीमा क्षेत्रों में निरंतर सैन्य तनाव, शरणार्थी समस्या और आतंकवाद विरोधी अभियान क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार और मानवीय आवाजाही को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए दीर्घकालिक समाधान के लिए सुरक्षा कार्रवाई के साथ-साथ राजनयिक संवाद और नागरिक संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।