काठमांडू। प्रधानमंत्री बालेंद्र साह (बालेन) आज हिमाली जिले मुस्तांग के लिए रवाना हुए हैं। उनके इस मुस्तांग दौरे को लेकर विभिन्न हलकों में अनावश्यक विवाद पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है, जो पूरी तरह निरर्थक प्रतीत होता है। गाईजात्रा पर्व नजदीक आने के साथ ही देश के प्रधानमंत्री मुस्तांग क्यों गए हैं, इस विषय पर विभिन्न संभावनाओं और अटकलों का दौर शुरू हो गया है।
प्रधानमंत्री के नजदीकी सूत्रों के अनुसार उनके इस दौरे के पीछे निम्नलिखित चार मुख्य कारण हैं:
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लक्जरी रिसॉर्ट का आनंद: मुस्तांग में विश्व प्रसिद्ध लक्जरी रिसॉर्ट्स (जैसे: शिंता मणि मुस्तांग/मोक्ष) संचालित हैं। प्रधानमंत्री रिसॉर्ट प्रेमी होने के कारण व्यस्त दिनचर्या से कुछ समय का विश्राम लेने और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद उठाने के लिए वहां गए हो सकते हैं।
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संप्रभु भूभाग तक सहज पहुंच: मुस्तांग नेपाल का अभिन्न और संप्रभु भूभाग है। एक संप्रभु राष्ट्र के प्रधानमंत्री होने के नाते देश के किसी भी स्थान का दौरा करना उनका स्वाभाविक अधिकार और कर्तव्य है।
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सीमावर्ती स्थानीय निकायों की निगरानी: मुस्तांग के सीमावर्ती स्थानीय निकायों—लोमांथांग गांवपालिका और लो-घेकर दामोदरकुंड गांवपालिका के कुछ दूरस्थ क्षेत्रों में चीनी पक्ष द्वारा केंद्र सरकार को पूर्व सूचना दिए बिना राहत सामग्री वितरित करने की शिकायतें आती रही हैं। इसी गतिविधि की वास्तविक स्थिति समझने और निगरानी करने के लिए प्रधानमंत्री वहां गए हो सकते हैं।
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सीमा स्तंभ का निरीक्षण: नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र (कोरला नाके के पास) में स्थित पिलर नंबर २४ (तथा पिलर नंबर ३३ के आसपास के क्षेत्रों) से संबंधित चिंताओं और लापता/अस्पष्ट कहे गए सीमा स्तंभ का प्रत्यक्ष निरीक्षण करने के लिए प्रधानमंत्री के स्वयं वहां पहुंचने की एक और प्रबल संभावना है।
प्रधानमंत्री का यह दौरा देश की आंतरिक शांति, सीमा सुरक्षा और पर्यटन को बढ़ावा देने से जुड़ा है, इसलिए इसमें अनावश्यक राजनीतिक विवाद खड़ा करने के बजाय वास्तविक उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक दिखता है।