नेपाल की जेनजी आंदोलन की अगुआ सरिश्मा थापा ने शीर्ष नेताओं पर कानूनी कार्रवाई करने अथवा जेल में बंद सभी प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने की मांग करते हुए सरकार का गंभीर ध्यानाकर्षण कराया है। असोज २० को काठमाडौँ में जारी एक बयान के माध्यम से थापा ने वर्ष २०८२ के भदौ २३ और २४ गते को हुए जेनजी जनआंदोलन के दौरान राज्य के दमन, योजनाबद्ध हिंसा और अराजकता की स्थिति का दावा किया है। उन्होंने इस बात पर भारी आपत्ति जताई है कि आंदोलन की योजना बनाने वाले लोग अब सत्ता में हैं, जबकि केवल प्रतिभागियों को जेल में रखा गया है।
थापा ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह, राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी के सभापति रवि लामिछाने, सभामुख डीपी अर्याल और मंत्री सुदन गुरुङ की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने आंदोलन के दौरान युवाओं को भड़काकर हिंसा फैलाने, जेल तोड़ने में सहयोग करने और आंदोलन को हिंसक बनाने में भूमिका निभाई। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान आदेश देने और गोलियां चलाने वाले सुरक्षा अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जबकि आम प्रदर्शनकारियों को जेल में रखना पूरी तरह से भेदभावपूर्ण और अन्यायपूर्ण है।
आंदोलन से जुड़ी घटनाओं में शामिल सभी पक्षों के साथ समान कानूनी व्यवहार की मांग करते हुए थापा ने बालेन्द्र शाह, रवि लामिछाने और सुदन गुरुङ पर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इन नेताओं पर कार्रवाई नहीं होती है, तो जेल में बंद सभी आंदोलनकारियों को तत्काल रिहा किया जाना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने जेनजी आंदोलन पर दमन करने वालों की निष्पक्ष जांच कर कड़ी सजा देने की भी मांग की है।
थापा ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस विषय को गंभीरता से नहीं लिया तो देश एक बार फिर आंदोलन की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने आगे कहा कि आगामी आंदोलन और भी भयावह रूप ले सकता है, इसलिए सभी को इसके लिए तैयार रहने का आह्वान किया गया है।