काठमांडू घाटी में झुग्गी बस्तियों पर बुलडोजर चलाए जाने को लेकर अखिल नेपाल सुकुम्वासी संघ ने विरोध जताया है।

संघ ने प्रेस वार्ता के माध्यम से सरकार से ऐसी कार्रवाई तुरंत रोकने की मांग की है। संगठन का कहना है कि सरकार को भूमिहीन और अव्यवस्थित बस्तियों की समस्या का समाधान करना चाहिए, न कि बस्तियों को हटाने का कदम उठाना चाहिए।

संघ के अनुसार 9 चैत को टोखा नगरपालिका वार्ड 7 धापासी में 18 घरों पर बुलडोजर चलाया गया। इससे पहले सिफल और भक्तपुर के क्षेत्रों में भी इसी तरह की कार्रवाई की गई थी।

संघ के प्रभारी नरेंद्र खड्का ने कहा कि वर्तमान सरकार का मुख्य दायित्व चुनाव कराना था, ऐसे में बस्तियों में बुलडोजर चलाने की आवश्यकता पर सवाल उठता है। उन्होंने सरकार बनाने की प्रक्रिया में शामिल दलों की चुप्पी पर भी आपत्ति जताई।

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नेता प्रकाश खरेल ने कहा कि सुकुम्वासी को अतिक्रमणकारी बताना उचित नहीं है, क्योंकि वे वर्षों से सरकारी या ऐलानी जमीन पर रह रहे हैं और उन्हें व्यवस्थित करने की आवश्यकता है।

प्रभावित स्थानीय निवासी दलबहादुर खड्का ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने पहले सूचना देकर चर्चा के लिए बुलाया, लेकिन बाद में अचानक बस्ती में बुलडोजर चला दिया। उन्होंने बताया कि वे 2003 से वहां रह रहे हैं और भूमि आयोग में आवेदन भी कर चुके हैं।

संघ ने मांग की है कि बुलडोजर कार्रवाई तुरंत रोकी जाए, भूमि सुधार लागू किया जाए, कानूनी संशोधन किया जाए और भूमिहीनों को स्वामित्व प्रमाण पत्र प्रदान करने की प्रक्रिया तेज की जाए।

यह मामला शहरी प्रबंधन और भूमिहीन नागरिकों के अधिकारों के बीच संतुलन की आवश्यकता को फिर से सामने लाता है।