आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित म्यूजिक प्लेटफॉर्म सुनो ने 'सीरीज डी' फंडिंग राउंड के तहत 400 मिलियन डॉलर की नई पूंजी जुटाई है। बुधवार को की गई इस घोषणा के बाद कंपनी का कुल मूल्यांकन अब 5.4 अरब डॉलर आंका गया है। महज सात महीने पहले कंपनी की वैल्यूएशन 2.45 अरब डॉलर थी, जो यह दर्शाती है कि कानूनी विवादों के बाद भी निवेशकों का भरोसा डगमगाया नहीं है।

यह वित्तीय बढ़त ऐसे समय में सामने आई है जब कंपनी संगीत उद्योग के कई बड़े नामों के साथ गंभीर कानूनी लड़ाई लड़ रही है। यूनिवर्सल म्यूजिक ग्रुप (यूएमजी), सोनी और जर्मन म्यूजिक कलेक्शन ऑर्गेनाइजेशन (जीईएमए) ने सुनो के खिलाफ अदालती कार्रवाई जारी रखी है। इसके विपरीत, वार्नर म्यूजिक ग्रुप ने पिछले साल नवंबर में ही कंपनी के साथ एक लाइसेंसिंग समझौता कर लिया था।

इस पूरे विवाद का मुख्य कारण वह तरीका है जिससे सुनो अपने एआई को प्रशिक्षित करता है। कंपनी ने स्वयं माना है कि वह कॉपीराइट वाले गानों पर अपने एआई मॉडल को ट्रेन करती है। हालांकि, सुनो का तर्क है कि 'फेयर यूज' (उचित उपयोग) के कानूनी सिद्धांत के तहत इसकी अनुमति है, लेकिन अदालत में इस सिद्धांत की व्याख्या हर मामले के तथ्यों के आधार पर अलग हो सकती है।

सुनो की कानूनी मुश्किलें पिछले महीने तब और बढ़ गईं जब सोनी और यूएमजी ने अपनी मूल शिकायत में बड़ा संशोधन किया। साल 2024 में दर्ज किए गए शुरुआती मुकदमे में सुनो पर 560 कॉपीराइट वाले गानों के अवैध इस्तेमाल का आरोप था। अब कंपनियों ने दावा किया है कि बिना अनुमति के एआई ट्रेनिंग के लिए 61,000 से अधिक अतिरिक्त गानों का उपयोग किया गया है।

इन तमाम कानूनी अड़चनों के बावजूद सुनो की बाजार में लोकप्रियता लगातार बरकरार है। यह ऐप वर्तमान में मोबाइल ऐप स्टोर के म्यूजिक चार्ट्स में शीर्ष पर बना हुआ है। बिलबोर्ड द्वारा प्राप्त एक रिपोर्ट के अनुसार, जब कंपनी अपने पिछले फंडिंग राउंड पर काम कर रही थी, तब इसके यूजर्स हर दिन 7 मिलियन से अधिक गाने तैयार कर रहे थे।

फंडिंग के इस नए दौर का नेतृत्व बॉन्ड कैपिटल ने किया है, जिसमें आईवीपी, फोररनर, यूनियन स्क्वायर वेंचर्स, एल्केन और क्वाइट जैसे निवेशक शामिल हुए। इसके अलावा मैट्रिक्स, लाइटस्पीड, मेनलो वेंचर्स और श्रोडर्स कैपिटल जैसे मौजूदा निवेशकों ने भी इस दौर में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है।

कंपनी ने बयान जारी कर कहा है कि इस निवेश में संगीत जगत के कुछ बेहतरीन कलाकारों, निर्माताओं और गीतकारों ने भी भाग लिया है, लेकिन किसी के नाम उजागर नहीं किए गए हैं। इन नामों को गुप्त रखना ध्यान खींचता है, क्योंकि यदि संगीत उद्योग के स्थापित कलाकार खुलकर सामने आते, तो इस धारणा को कमजोर किया जा सकता था कि पूरा संगीत उद्योग जेनेरेटिभ एआई तकनीक के पूरी तरह खिलाफ है।