काठमांडू में तकनीक और कूटनीति का एक नया संगम देखने को मिला है। नेपाल स्थित भारतीय दूतावास और नेपाल-भारत उद्योग वाणिज्य संघ (एनआईसीसीआई) ने संयुक्त रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सहयोग पर एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया। इस महत्वपूर्ण सत्र में दोनों देशों के सरकारी प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, स्टार्टअप संस्थापकों और व्यापारिक दिग्गजों ने हिस्सा लिया, जिसका मुख्य उद्देश्य केवल विदेशी सॉफ्टवेयर को अपनाना नहीं, बल्कि मिलकर स्वदेशी डिजिटल बुनियादी ढांचा तैयार करना है।
इस साझेदारी का सबसे बड़ा और सीधा प्रभाव दोनों देशों के भाषाई और डिजिटल सार्वजनिक ढांचे पर पड़ने वाला है। भारत सरकार के डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन और काठमांडू विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (डीपीआई-एआई) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की उपस्थिति में नई दिल्ली में आदान-प्रदान किया गया यह समझौता मुख्य रूप से 'वॉइस-फर्स्ट' भाषा अनुवाद प्रणालियों और बहुभाषिक डिजिटल इकोसिस्टम के निर्माण पर केंद्रित है, जिससे कम संसाधनों वाली क्षेत्रीय भाषाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाया जा सके।
यह उभरता हुआ डिजिटल तंत्र पहले से ही युवा उद्यमियों के सपनों को पंख दे रहा है। भारतीय दूतावास के प्रथम सचिव सुमन शेखर ने जानकारी दी कि 'इंडिया-नेपाल स्टार्टअप पार्टनरशिप नेटवर्क' (इन-स्प्यान) के दूसरे बैच की शुरुआत 1 जून 2026 से हो चुकी है। इस पूरी तरह से वित्त पोषित (फुल्ली-फंडेड) आठ सप्ताह के नवाचार कार्यक्रम के तहत नेपाल के 25 चुनिंदा स्टार्टअप चेन्नई में आईआईटी मद्रास प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज फाउंडेशन में गहन प्रशिक्षण ले रहे हैं।
इससे पहले के पहले बैच में शामिल स्टार्टअप्स में से 9 नेपाली स्टार्टअप्स को आईआईटी मद्रास इनक्यूबेशन सेल से सीधे निवेश और इनक्यूबेशन के प्रस्ताव मिले थे, जो इस कार्यक्रम की सफलता को दर्शाता है। एनआईसीसीआई के अध्यक्ष सुनील केसी ने भारतीय एआई कंपनियों को नेपाल के सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के साथ मिलकर काम करने और यहाँ अपनी व्यावसायिक उपस्थिति दर्ज कराने के लिए आमंत्रित किया, ताकि प्रौद्योगिकी के माध्यम से आर्थिक प्रगति को गति दी जा सके।
सेमीनार के मुख्य वक्ता और 'इंडियाएआई मिशन' के तहत ₹246.72 करोड़ की वित्तीय और कंप्यूट सहायता प्राप्त करने वाले सर्वम एआई के सह-संस्थापक डॉ. प्रत्युष कुमार ने संप्रभु तकनीकी मॉडल की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हाशिए पर मौजूद आबादी तक डिजिटल सेवाएं पहुंचाने के लिए 'स्पीच-टू-टेक्स्ट' (आवाज से पाठ) मॉडल बेहद जरूरी हैं। उन्होंने डेटा संप्रभुता की रक्षा और घरेलू प्रतिभाओं को तराशने के लिए भारत और नेपाल के बीच संयुक्त अनुसंधान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर बल दिया।
यह द्विपक्षीय प्रगति इस साल की शुरुआत में नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' के वैश्विक लक्ष्यों के अनुरूप है, जहां 92 देशों ने जिम्मेदार एआई प्रशासन का समर्थन किया और 200 अरब डॉलर से अधिक के निवेश के संकल्प लिए गए। इसी समिट के दौरान भारत ने अपनी संप्रभु कंप्यूट क्षमता में 20,000 अतिरिक्त जीपीयू जोड़े हैं। काठमांडू के इस सेमिनार से निकले निष्कर्ष स्पष्ट संकेत देते हैं कि भविष्य में दोनों पड़ोसी देश मिलकर इन विशाल तकनीकी क्षमताओं को जमीनी स्तर पर आम नागरिकों के जीवन को सुगम बनाने वाले व्यावहारिक उपकरणों में बदल देंगे।