नेपाल में अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय विकास एजेंसी (USAID) के वित्तपोषित कार्यक्रमों में हुई कटौती का असर अब अमेरिकी राजनीति में दिखाई दे रहा है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) की एक रिपोर्ट के बाद अमेरिकी कंजर्वेटिव नेताओं ने विदेशी सहायता नीति पर कड़ा ऐतराज जताया है।

एपी की रिपोर्ट में बताया गया था कि U.S. फंडिंग रुकने के कारण नेपाल में लगभग 100 ट्रांसजेंडर स्वास्थ्य कार्यकर्ता अपनी नौकरियां गंवाने के बाद यौन कार्य करने को मजबूर हो गए हैं।

रिपोर्ट में पूर्व स्वास्थ्य कार्यकर्ता रूबी लामा के हवाले से बताया गया कि पहले अमेरिकी सहायता से मुफ्त कंडोम, लुब्रिकेंट और एचआईवी रोधी दवाएं उपलब्ध कराई जाती थीं, जो अब पूरी तरह बंद हो चुकी हैं।

हालांकि, इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अमेरिकी कंजर्वेटिव वर्ग ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि यह रिपोर्ट इस बात का सबूत है कि अमेरिकी करदाताओं का पैसा गलत जगह खर्च हो रहा था।

टेक्सास के रिपब्लिकन सांसद ब्रैंडन गिल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसों से विदेशी कार्यक्रमों को फंडिंग देना सही नहीं था और USAID की फंडिंग रोकना बिल्कुल उचित फैसला है।

वहीं, मीडिया विश्लेषक मैट वॉल्श और द फेडरलिस्ट की मुख्य संपादक मौली हेमिंग्वे ने भी मीडिया कवरेज की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिकी जनता के पैसे का इस्तेमाल विदेशी नौकरी सुरक्षा कार्यक्रमों में नहीं होना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पद संभालते ही विदेशी सहायता कार्यक्रमों की समीक्षा के लिए 90 दिनों का प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद USAID ने अपने साझेदार संगठनों को काम रोकने के आदेश जारी किए थे।

जहां एक तरफ सहायता रुकने से नेपाल में जनस्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है, वहीं अमेरिका में विदेशी मदद के औचित्य को लेकर बहस और तेज हो गई है।