अमेरिका और इज़राइल के नेतृत्व में ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान ने एक गंभीर वैश्विक ऊर्जा संकट और व्यापक मानवीय त्रासदी को जन्म दिया है। तेल की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत की भारी वृद्धि के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे दबाव को देखते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित व्यापार सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक गठबंधन का तत्काल आह्वान किया है।

शनिवार को सोशल मीडिया के माध्यम से राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देशों से अपील की कि वे अपने युद्धपोत भेजकर इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को सुरक्षित करें। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल गुजरता है, और वर्तमान में यह मार्ग ईरानी हमलों के भारी खतरे का सामना कर रहा है।

पेंटागन के अनुसार, 28 फरवरी को शुरू हुए इस सैन्य अभियान के तहत अमेरिकी और इज़राइली बलों ने ईरान के भीतर 15,000 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। शुक्रवार को अमेरिकी सेना ने ईरान के प्रमुख तेल निर्यात केंद्र, खार्ग द्वीप पर हमला किया। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि इस कार्रवाई में ऊर्जा बुनियादी ढांचे को बचाते हुए केवल सैन्य लक्ष्यों को नष्ट किया गया। इसके जवाब में ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके तेल संयंत्रों पर आगे कोई हमला होता है, तो वह अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों को निशाना बनाएगा।

इस युद्ध का मानवीय प्रभाव अत्यंत विनाशकारी रहा है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के अनुसार, ईरान के भीतर लगभग 32 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं, जिनमें से अधिकांश ने राजधानी तेहरान और अन्य बड़े शहरों से पलायन किया है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि हमलों में अब तक 1,200 से अधिक लोग मारे गए हैं, हालांकि इस आंकड़े की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है। पहले ही दिन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद, उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया नेता घोषित किया गया था, लेकिन उनके घायल होने की खबरों के बीच वे अब तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं।

इस बीच, युद्ध का दायरा पूरे मध्य पूर्व में फैल चुका है। लेबनान में, ईरान समर्थित हिजबुल्लाह और इज़राइली सेना के बीच सीधे संघर्ष के कारण हालात बिगड़ गए हैं। लेबनानी अधिकारियों के अनुसार, इज़राइली हमलों में कम से कम 826 लोगों की मौत हो चुकी है और दक्षिणी लेबनान से लाखों लोग विस्थापित हुए हैं।

ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करते हुए इज़राइल और खाड़ी देशों की ओर मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। यरुशलम में विस्फोटों की आवाजें सुनी गई हैं, जबकि संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा बंदरगाह के पास काला धुआं देखा गया है। इराक स्थित अमेरिकी दूतावास पर युद्ध शुरू होने के बाद से दूसरी बार ड्रोन हमला हुआ है। कुवैत हवाई अड्डे का रडार सिस्टम क्षतिग्रस्त हो गया है, और सऊदी अरब तथा कतर ने अपने हवाई क्षेत्र में मिसाइलों को मार गिराने का दावा किया है।

इस संघर्ष में अब तक 13 अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है, जिनमें से छह की मौत इराक में एक विमान दुर्घटना में हुई। अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए यूएसएस त्रिपोली और लगभग 2,500 अतिरिक्त नौसैनिकों को तैनात किया है। युद्ध के कारण खेल जगत भी प्रभावित हुआ है; बहरीन और सऊदी अरब में होने वाली अंतरराष्ट्रीय कार रेस रद्द कर दी गई हैं। वहीं, देशद्रोह के आरोपों के डर से ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई ईरानी महिला फुटबॉल टीम की कुछ सदस्यों ने वहीं शरण मांगी है।

जैसे-जैसे यह संघर्ष लेबनान और खाड़ी देशों को अपनी चपेट में ले रहा है, इसके जल्द थमने की उम्मीद क्षीण होती जा रही है, जो भविष्य में वैश्विक बाजारों और क्षेत्रीय शांति के लिए एक स्थायी और गंभीर खतरा बना हुआ है।