शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के वरिष्ठ नेता Balen Shah ने कहा कि नेपाल में राजनीतिक व्यवस्थाएँ बदलती रहीं, लेकिन सत्ता का मूल चरित्र कभी नहीं बदला। शहीद दिवस के अवसर पर दिए गए उनके संदेश में यह टिप्पणी देश की लंबी राजनीतिक यात्रा पर सवाल खड़े करती है।

उन्होंने गंगालाल श्रेष्ठ, दशरथ चंद, धर्मभक्त माथेमा और शुक्रराज शास्त्री के बलिदान को याद करते हुए कहा कि राणा शासन के अंत के बावजूद राज्य जनता के प्रति जवाबदेह नहीं बन सका। इसके बाद भी लोगों को लगातार संघर्ष करना पड़ा।

बालेन के अनुसार, यह स्थिति आज भी जारी है। उन्होंने भदौ में हुए जेन-जी आंदोलन का उल्लेख किया, जहाँ सुशासन और भ्रष्टाचार के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं और छात्रों को अपनी जान गंवानी पड़ी। यह दिखाता है कि शहीदों के सपने अब तक पूरे नहीं हुए हैं।

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उन्होंने कहा कि अब इन सपनों को साकार करने की जिम्मेदारी मौजूदा पीढ़ी पर है। इसके लिए गहराई तक फैले भ्रष्टाचार को खत्म करने, राज्य संस्थानों में अत्यधिक दलगत हस्तक्षेप रोकने और पारदर्शी व जवाबदेह शासन स्थापित करने की जरूरत है।

अपने संदेश के अंत में बालेन शाह ने कहा कि शहीदों के बलिदान को नजरअंदाज करने का समय अब खत्म हो चुका है। उन्होंने सभी ज्ञात और अज्ञात शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए भविष्य में किसी को शहीद न बनना पड़े, ऐसी व्यवस्था बनाने का आह्वान किया।