हवाई यात्रियों को लाखों की छूट, मधेश के लिए 100 रुपये की सीमा: बालेन सरकार के 'हवा-हवाई' नियम पर गंभीर सवाल

काठमांडू। नेपाल-भारत सीमा नाके से 100 रुपये से अधिक मूल्य का सामान लाने पर अनिवार्य रूप से कस्टम ड्यूटी (सीमा शुल्क) चुकाने का सरकार का नियम बेहद 'हवा-हवाई' (अतार्किक) और भेदभावपूर्ण प्रतीत हो रहा है। वर्तमान प्रधान मंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन) को सत्ता में लाने के लिए नेपाल-भारत सीमा से लगे मधेश की जनता ने भारी संख्या में वोट दिया था। लेकिन, उन्हीं हाशिए पर रहने वाले लोगों के दैनिक जीवन पर सीधा और नकारात्मक प्रभाव डालने वाली बालेन सरकार की इस 100 रुपये की कस्टम सीमा ने अब जनस्तर पर भारी असंतोष पैदा कर दिया है।

मधेश का वोट, बालेन की चोट मधेश में सीमा लोगों के घर के आंगन में ही है। सीमा पार जाकर दैनिक उपभोग की वस्तुएं (नमक, तेल, चावल) लाना वहां के लोगों की मजबूरी और जीवनशैली दोनों है। काठमांडू के किसी सुपरमार्केट में 100 रुपये में एक अच्छी चॉकलेट भी नहीं मिलती, न ही किसी कॉफी शॉप में एक 'अमेरिकानो' कॉफी आती है। लेकिन, बालेन सरकार ने उसी 100 रुपये को कस्टम का पैमाना बनाकर मधेश के गरीब लोगों की रसोई पर प्रहार किया है।

हवाई यात्रियों पर मेहरबानी, मधेशियों से सौतेला व्यवहार! यह 100 रुपये की सीमा कितनी अव्यावहारिक है, यह बात त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से आने वाले हवाई यात्रियों को मिलने वाली कस्टम छूट से तुलना करने पर स्पष्ट हो जाती है। कस्टम विभाग के ही नियमों के अनुसार, हवाई यात्रा करने वाला एक व्यक्ति बिना कस्टम ड्यूटी चुकाए लाखों से करोड़ों रुपये मूल्य का सामान ला सकता है:

  • महंगी शराब: 1 लीटर विदेशी व्हिस्की या शराब। (ब्रांडेड व्हिस्की की कीमत लाखों में हो सकती है)।

  • सोने के आभूषण: महिलाओं के लिए 50 ग्राम तक और पुरुषों के लिए 25 ग्राम तक के सोने के आभूषण (जिनकी कीमत लाखों में होती है)।

  • इलेक्ट्रॉनिक्स: 32 इंच तक का टेलीविजन, एक लेटेस्ट स्मार्टफोन, लैपटॉप या टैबलेट, और कैमरा।

  • लग्जरी सामान और खाद्य पदार्थ: लाखों कीमत वाले लग्जरी बैग, स्मार्टवॉच, और 7 किलो तक खाद्य पदार्थ।

थोड़ी सी भी समझदारी दिखाई जाए तो हवाई यात्री 'ग्रीन चैनल' के जरिए वैध रूप से करोड़ों रुपये का सामान बिना कस्टम चुकाए ला सकते हैं। एक तरफ हवाई यात्रा करने वाले रसूखदारों को करोड़ों की छूट दी जाती है, तो दूसरी तरफ मधेश के नाकों पर 2 किलो चीनी और एक बोरी चावल खरीदकर लाने वाली बेबस जनता को 100 रुपये का कानून दिखाकर प्रताड़ित किया जाता है। जनता का आक्रोश भरा सवाल है—"हवाई यात्रियों पर मेहरबानी और मधेशियों से सौतेला व्यवहार, क्या यह जायज़ है? बोल सरकार!"

उत्तरी सीमा पर छूट, दक्षिणी सीमा पर 'अनागरिक' जैसा व्यवहार इतना ही नहीं, नेपाल की उत्तरी (चीन) और दक्षिणी (भारत) सीमा पर सरकार का दोहरा चरित्र उजागर हो गया है। नेपाल-चीन सीमा से लगे हुम्ला, मुस्तांग जैसे पहाड़ी जिलों में चीनी सरकार खुलेआम करोड़ों रुपये का सामान मुफ्त में बांटती है। इस तरह बांटे जाने वाले सामान का कोई सटीक आंकड़ा या अनुमान केंद्र सरकार को भी नहीं होता है और वहां कस्टम का कोई झमेला नहीं है।

एक ही देश में दो तरह के नियम देखकर दक्षिणी सीमा के निवासी पूछने लगे हैं—"क्या सिर्फ नेपाल-चीन बॉर्डर के लोग ही इस देश के नागरिक हैं? और क्या मधेश के मधेशी अनागरिक हैं?"

गरीब जनता के चूल्हे जलने तक को मुश्किल कर देने वाले और स्पष्ट रूप से वर्ग-भेदभाव दर्शाने वाले इस 100 रुपये के अव्यावहारिक कस्टम नियम को तत्काल रद्द करने की आवाज अब हर तरफ उठने लगी है।