सुनसरी जिले के देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका वार्ड नंबर तीन स्थित कप्तानगंज में हुई हिंसक घटना में मारे गए युवाओं को न्याय दिलाने के लिए अपनी मांगें पूरी न होने पर देह त्याग करने की कड़ी चेतावनी के साथ काठमांडू के माइतीघर मंडला में आमरण अनशन पर बैठे विनय यादव का सत्याग्रह आज आठवें दिन में प्रवेश कर गया है। उनके द्वारा उठाए गए गंभीर मुद्दों और न्यायपूर्ण मांगों के प्रति एकजुटता व्यक्त करने के लिए अनशन स्थल पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, मधेशी नेताओं, नागरिक समाज के अगुओं, शुभचिंतकों तथा आम जनता की भारी उपस्थिति बनी हुई है। इतने बड़े जनसमर्थन और चिंता के बावजूद सरकारी पक्ष की ओर से नागरिक के जीवन की रक्षा और उठाई गई संवेदनशील मांगों के प्रति अभी तक कोई ठोस पहल या गंभीरता नहीं दिखाई गई है। राज्य की यह चुप्पी और एक नागरिक द्वारा न्याय के लिए मृत्यु का वरण करने को तैयार होने की यह कठोर परिस्थिति आम लोगों के मानस पटल पर एक गंभीर प्रश्न खड़ा करती है, आखिरकार विनय यादव कौन हैं?
विनय यादव नेपाल के एक सक्रिय राजनीतिक तथा सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वह राष्ट्रीय एकता दल के केंद्रीय अध्यक्ष हैं तथा राष्ट्रीय एकता अभियान नामक नागरिक मंच के मुख्य संयोजक एवं अगुआ के रूप में भी जाने जाते हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक दल और अभियान के माध्यम से लंबे समय से राष्ट्रीयता, सीमा सुरक्षा, सनातन धर्म के संरक्षण, हिंदू राष्ट्र की वकालत और नागरिक अधिकारों के विभिन्न मुद्दों पर निरंतर आवाज उठाते हुए सड़कों से लेकर सदन तक का ध्यान आकर्षित करने वाले आंदोलन किए हैं। देश की स्वाधीनता और नागरिकों के न्याय के लिए उन्होंने स्वयं को सदैव अग्रिम पंक्ति में खड़ा किया है।

राष्ट्रीय एकता दल और राष्ट्रीय एकता अभियान द्वारा उपलब्ध कराई गई आधिकारिक जानकारी को आधार मानें तो कार्यकर्ता विनय यादव ने देश और नागरिकों के हित में अनगिनत न्यायपूर्ण आंदोलनों में नेतृत्वकारी और ऐतिहासिक योगदान दिया है। उनके नेतृत्व में हुए आंदोलनों और पहलों से हासिल प्रमुख उपलब्धियों को अत्यंत महत्व के साथ आगे बढ़ाया गया है। इस पृष्ठभूमि में, उनके समर्थकों द्वारा दावा किए गए मुख्य योगदानों को उनके संघर्ष के महत्वपूर्ण पहलू के रूप में देखा जाता है।
विनय यादव के नेतृत्व में हुए आंदोलनों से सुशासन और बुनियादी ढांचे के विकास में कई राष्ट्रीय मुद्दों के समाधान का दावा किया गया है। विशेष रूप से पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण प्रक्रिया में हुए कथित भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने, उसकी निष्पक्ष जांच कराने और शामिल योजनाकारों को गिरफ्तार कराने के लिए की गई पहल को उनकी बड़ी उपलब्धि के रूप में लिया जाता है। इसके साथ ही, उसी हवाई अड्डे से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू कराने के लिए उठाए गए कदम और गौतम बुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ानों के संचालन के लिए बनाया गया निरंतर दबाव देश के बुनियादी ढांचे के विकास के प्रति उनकी सजगता को दर्शाता है। इसी प्रकार, देश में विद्यमान आर्थिक मंदी को ध्यान में रखते हुए सांसदों के संसदीय विकास कोष की राशि का वितरण बंद कराने के लिए किए गए सशक्त आंदोलन को भी उनका महत्वपूर्ण कार्य माना गया है।

राष्ट्रीयता और सीमा सुरक्षा के सवाल पर भी उनकी भूमिका अत्यंत आक्रामक और प्रभावी बताई गई है। नेपाल की उत्तरी सीमा, विशेष रूप से हुम्ला और गोरखा जिले के चुमनुब्री स्थित रुइला नाके पर चीन द्वारा किए गए कथित नेपाली भूमि अतिक्रमण के खिलाफ उन्होंने जोरदार आवाज उठाई थी। सन २०२२ फरवरी महीने में उन्हीं के नेतृत्व में राष्ट्रीय एकता अभियान ने काठमांडू स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यालय पहुंचकर हुम्ला में हुए चीनी अतिक्रमण के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करते हुए ज्ञापन सौंपा था। इस आंदोलन के फलस्वरूप जांच समिति गठित करने में सफलता मिलने का दावा किया गया है। वैसे ही, भूमि व्यवस्था, सहकारी तथा गरीबी निवारण मंत्रालय पर अतिक्रमित नेपाली भूमि वापस लाने और सीमा का संयुक्त निरीक्षण करने के लिए निरंतर दबाव बनाने का काम भी उन्हीं के द्वारा किया गया था। चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव को राष्ट्रघाती बताते हुए उसे रद्द करने की मांग के साथ काठमांडू में विशाल प्रदर्शन करने के साथ-साथ रक्षा मंत्रालय के माध्यम से चीन से अनावश्यक रूप से हथियार खरीदने की प्रक्रिया को रद्द कराने के लिए उनके द्वारा दिए गए दबाव को भी प्रमुख उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसके अतिरिक्त, चीनी नागरिकों द्वारा वीरगंज में गैर-कानूनी रूप से संचालित अवैध व्यापारिक गतिविधियों को बंद कराने के कार्य में भी उनकी सक्रियता रही थी।
आंतरिक राजनीति और सामाजिक न्याय के विषयों पर भी वह उतने ही प्रखर हैं। मधेश प्रदेश सरकार द्वारा लाए जाने वाले मदरसा विधेयक को स्थगित कराने में उनकी भूमिका और मधेश प्रदेश के तत्कालीन भौतिक पूर्वाधार विकास मंत्री जितेंद्र सोनल द्वारा कमीशन के लिए रोके गए उपभोक्ता समिति के भुगतान का निपटारा कराने की पहल उनके जनपक्षीय रुख को दर्शाती है। इसी तरह, ईसाई मिशनरियों द्वारा प्रायोजित माने जाने वाले और एक प्रतिष्ठित अभिनेता राजेश हमाल की जाति पर प्रश्न उठाने वाले टेलीविजन कार्यक्रम को बंद कराने के लिए उन्होंने आंदोलन किया था। इसके अलावा, मुस्लिम आयोग पर विशेष विचारधारा को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए उस आयोग को खारिज करने और नेपाल को पुनः हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग पर भी वह निरंतर सड़क आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं।

अतीत में देश, समाज और राष्ट्रीयता के लिए इतनी आवाज उठाने वाले वही विनय यादव अब विशुद्ध रूप से नागरिक न्याय की खोज में अपनी जान की बाजी लगाकर सड़कों पर उतर आए हैं। लगातार आठ दिनों से अन्न और जल का त्याग करके अनशन पर बैठने से उनकी स्वास्थ्य स्थिति दिनों-दिन अत्यंत नाजुक और जटिल होती जा रही है। जब राज्य तंत्र नागरिकों की जायज आवाज सुनने से पीछे हटता है और न्याय के दरवाजे बंद कर देता है, तब नागरिक मजबूर होकर ऐसा कठोर और कष्टदायक रास्ता चुनने पर मजबूर हो जाते हैं। ऐसी ही स्थिति की ओर इशारा करते हुए कहा जाता है, आमरण अनशन शक्तिहीन लोगों का एक शक्तिशाली हथियार है। राज्य सत्ता के अहंकार को तोड़ने और न्याय की स्थापना के लिए प्रयोग किए जाने वाले इस शांतिपूर्ण लेकिन घातक हथियार के मूल्य को राज्य द्वारा समझा जाना आवश्यक है। मौत से जूझते हुए न्याय की गुहार लगा रहे विनय यादव के जीवन की रक्षा करने और उनके द्वारा उठाई गई न्यायोचित मांगों को अविलंब संबोधित करने के लिए सरकार को तत्काल वार्ता और संवाद के दरवाजे खोलने ही होंगे।

राष्ट्रीय एकता दल के अध्यक्ष तथा राष्ट्रीय एकता अभियान के संयोजक कार्यकर्ता विनय यादव द्वारा देश, समाज, राष्ट्रीयता और जनजीविका के पक्ष में दिए गए प्रमुख योगदानों तथा उनके नेतृत्व में हुए आंदोलनों की सूची इस प्रकार है:
१. पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भ्रष्टाचार का खुलासा: पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा निर्माण प्रक्रिया में हुए कथित भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करते हुए उसकी निष्पक्ष जांच और दोषियों को कानून के दायरे में लाने के लिए की गई पहल।
२. पोखरा से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें: पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन शुरू कराने के लिए उठाए गए निरंतर कदम।
३. हुम्ला सीमा अतिक्रमण के खिलाफ आंदोलन: हुम्ला में चीन द्वारा नेपाली भूमि के अतिक्रमण के विषय पर आंदोलन करके सरकार द्वारा जांच समिति का गठन कराने का योगदान।
४. गौतम बुद्ध हवाई अड्डे का संचालन: भैरहवा स्थित गौतम बुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से नियमित रूप से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन के लिए दिया गया दबाव।
५. अनावश्यक हथियार खरीद रद्द: रक्षा मंत्रालय के माध्यम से चीन से की जाने वाली अनावश्यक हथियारों की खरीद प्रक्रिया को रद्द कराने में दिया गया योगदान।
६. ईसाई मिशनरी प्रायोजित कार्यक्रम बंद: ईसाई मिशनरी द्वारा प्रायोजित माने जाने वाले तथा महानायक राजेश हमाल की जाति पर सवाल उठाने वाले विवादित टेलीविजन कार्यक्रम को बंद कराने के लिए किया गया आंदोलन।
७. मदरसा विधेयक स्थगन: मधेश प्रदेश सरकार द्वारा लाए जाने वाले विवादित मदरसा विधेयक को स्थगित कराने में निभाई गई मुख्य भूमिका।
८. उपभोक्ता समिति का भुगतान निपटारा: मधेश प्रदेश के तत्कालीन भौतिक पूर्वाधार विकास मंत्री जितेंद्र सोनल द्वारा कमीशन के लिए रोके गए उपभोक्ता समिति के भुगतान का निपटारा कराने की पहल।
९. वीरगंज में अवैध व्यापार बंद: चीनी नागरिकों द्वारा वीरगंज में गैर-कानूनी रूप से संचालित अवैध व्यापारिक गतिविधियों को बंद कराने का कार्य।
१०. संसदीय विकास कोष रद्द करने की मांग: देश में मौजूद आर्थिक मंदी को ध्यान में रखते हुए सांसदों के संसदीय विकास कोष की राशि का वितरण बंद कराने के लिए किया गया आंदोलन।

अन्य प्रमुख योगदान एवं गतिविधियां:
११. उत्तरी सीमा सुरक्षा और रुइला नाका विवाद: गोरखा के चुमनुब्री स्थित रुइला नाके पर चीन द्वारा लगाई गई बाड़ और भूमि अतिक्रमण के खिलाफ आवाज उठाते हुए काठमांडू स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यालय तथा भूमि व्यवस्था मंत्रालय में ज्ञापन सौंपना।
१२. बीआरआई परियोजना का विरोध: चीन की 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' परियोजना को राष्ट्रघाती बताते हुए उसे रद्द करने के लिए काठमांडू में विशाल विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करना।
१३. हिंदू राष्ट्र और सनातन धर्म की रक्षा: नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग के साथ सनातन धर्म और वैदिक परंपरा के संरक्षण के लिए निरंतर नागरिक आंदोलन चलाना।
१४. सुनसरी (देवानगंज) घटना के पीड़ितों को न्याय: सुनसरी के देवानगंज (कप्तानगंज) में हुई हिंसक घटना में मारे गए और घायल हुए युवाओं को न्याय दिलाने तथा दोषियों पर कार्रवाई कराने के लिए काठमांडू के माइतीघर में आमरण अनशन पर बैठना।